हमर छत्तीसगढ़

अरमरीकला से पूरे बालोद तक नकली खाद का कथित जाल!

करोड़ों की खाद पकड़ी, फिर भी कार्रवाई पर सवाल—पैसे के लेन-देन की चर्चा क्यों?

संपादक:- मीनू साहू 

बालोद। किसानों की मेहनत से खिलवाड़ करने वाले कथित नकली खाद कारोबार पर बालोद जिले में कृषि विभाग की कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ दिन पहले अरमरीकला स्थित एक दुकान के गोदाम में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा बड़ी मात्रा में कथित नकली खाद पकड़े जाने की बात सामने आई। बताया जा रहा है कि बरामद खाद की कीमत करोड़ों रुपये तक बताई जा रही है। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है तो यह मामला सामान्य खाद बिक्री की अनियमितता नहीं, बल्कि किसानों के साथ संभावित बड़े धोखे का मामला हो सकता है।

लेकिन कार्रवाई के बाद जो सवाल उठ रहे हैं, वे इससे भी ज्यादा गंभीर हैं। चर्चा है कि गोदाम मालिक को बालोद बुलाकर कृषि विभाग के एसडीओ स्तर के अधिकारी के समक्ष पूछताछ की गई और बाद में छोड़ दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है—यदि करोड़ों की कथित नकली खाद बरामद हुई थी, तो कार्रवाई इतनी नरम क्यों रही?

अब इस पूरे मामले में पैसे के कथित लेन-देन की चर्चा भी सामने आ रही है। हालांकि इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले निष्पक्ष जांच जरूरी है, लेकिन यदि ऐसी शिकायत या प्रमाण मौजूद है तो प्रशासन को इसकी जांच क्यों नहीं करनी चाहिए? क्या किसी अधिकारी, कर्मचारी, व्यापारी या बिचौलिए के बीच आर्थिक लेन-देन हुआ? क्या किसी दबाव में कार्रवाई प्रभावित हुई? इन सवालों का जवाब जांच से ही सामने आ सकता है।

कलेक्टर से जिले की जनता को जवाब चाहिए

बालोद जिला प्रशासन और कलेक्टर को स्पष्ट करना चाहिए कि अरमरीकला मामले में अब तक कितनी खाद जब्त की गई, उसके नमूने कहां भेजे गए, प्रयोगशाला रिपोर्ट क्या आई और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कौन-सी कानूनी कार्रवाई की गई।

सिर्फ अरमरीकला ही क्यों? पूरे जिले में खाद दुकानों और गोदामों की अचानक जांच क्यों नहीं होनी चाहिए? बालोद, गुरुर, गुंडरदेही, डौंडीलोहारा और दल्ली राजहरा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में खाद के स्टॉक, बिल, लाइसेंस और सप्लाई नेटवर्क की जांच जरूरी है।

किसान अपनी मेहनत की कमाई से खाद खरीदता है। यदि नकली खाद उसके खेत तक पहुंचती है तो नुकसान सिर्फ खाद की कीमत का नहीं, बल्कि पूरी फसल और परिवार की आय का हो सकता है।

इसलिए प्रशासन को अरमरीकला की कथित बरामदगी से लेकर पैसे के लेन-देन की चर्चा तक हर पहलू की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। आरोप सही हैं तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो और यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करे।

अब सवाल यही है—करोड़ों की कथित नकली खाद आखिर किस नेटवर्क से आई और कार्रवाई के बाद उठ रही पैसे के लेन-देन की चर्चा की सच्चाई कब सामने आएगी?

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