बालोद आत्मानंद भर्ती कांड – परिवारवाद, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक संरक्षण का खुला खेल
बालोद आत्मानंद भर्ती कांड – परिवारवाद, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक संरक्षण का खुला खेल

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आत्मानंद विद्यालय भर्ती प्रक्रिया ने एक बार फिर से परिवारवाद और भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। नगर पालिका पार्षद एवं कांग्रेस के युवा नेता सुमित शर्मा ने बताया कि जिस भर्ती को पारदर्शिता और मेरिट पर होना चाहिए था, वह पैसों और रिश्तेदारी के धंधे में बदल गई।जारी लेक्चरर सूची में आकांक्षा कोसरे का चयन हुआ, जो भर्ती समिति के नोडल अधिकारी रहे डीपी कोसरे की बेटी हैं। नियम साफ कहते हैं कि समिति में वही सदस्य बैठ सकता है जिसके परिवार से कोई उम्मीदवार न हो, लेकिन प्रशासन ने इस नियम को ताक पर रखकर डीपी कोसरे को प्रक्रिया का नायक बना दिया। विरोध बढ़ा तो औपचारिक रूप से लेखराम साहू को नोडल बना दिया गया, लेकिन असली कमान कोसरे के पास ही रही।

सूत्र बताते हैं कि मेरिट लिस्ट में आकांक्षा से ऊपर कई योग्य उम्मीदवार थे, मगर उन्हें नजरअंदाज कर घर की बेटी को नौकरी दिलाई गई। इस बीच दलालों की सक्रियता भी सामने आई। लेखराम साहू गाँव-गाँव जाकर अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेने में जुटे रहे। सजेस् घोटिया स्कूल में आकांक्षा कोसरे का चयन इस खेल का प्रत्यक्ष प्रमाण है। चयन समिति से लिया गया शपथ पत्र महज औपचारिकता साबित हुआ, क्योंकि परिवारवाद और सिफारिश हावी रही।बालोद की जनता सवाल पूछ रही है कि क्या आत्मानंद जैसी शिक्षा भर्ती भी अब दलाली और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ेगी? प्रशासन का काम योग्य उम्मीदवारों को न्याय देना है या परिवार विशेष को फायदा पहुँचाना? यह प्रकरण केवल भर्ती घोटाला नहीं बल्कि प्रशासनिक तंत्र की नैतिक दिवालियापन का सबूत है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि डीपी कोसरे का स्थानांतरण धमतरी जिले में हो चुका है, फिर भी उन्हें अब तक रिलीव क्यों नहीं किया गया? यह साबित करता है कि जिला प्रशासन उन्हें संरक्षण दे रहा है ताकि वे बालोद में रहकर प्रक्रिया को प्रभावित कर सकें। स्थानांतरण आदेश का पालन न करना सेवा अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण है।
कानूनी दृष्टि से यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 120B (षड्यंत्र), 166 (कानून का उल्लंघन), 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज़ का उपयोग), 409 (आपराधिक विश्वासघात) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत गंभीर अपराध है।इस पूरे कांड की निष्पक्ष जाँच ACB/EOW से होना अब अनिवार्य है ताकि दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो सके और जनता का भरोसा शिक्षा व्यवस्था पर वापस लौट सके।





