शिक्षक भर्ती घोटाला बिना साक्षात्कार और अनुभव के चयनित हुआ लेख राम साहू आदेश पत्र से खुला बड़ा राज़

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में शिक्षा विभाग की पुरानी फाइलों से अब एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने वर्षों से दबी भर्ती प्रक्रिया की सच्चाई को उजागर कर दिया है। 1996 से 1998 के बीच हुई शिक्षक भर्ती में लेख राम साहू का चयन न केवल संदिग्ध साबित हो रहा है, बल्कि यह पूरी प्रक्रिया पर भ्रष्टाचार का साया डालता है।
जांच में यह सामने आया है कि इस भर्ती में कुल 30 पद स्वीकृत थे, परंतु चयन सूची में केवल 29 नाम थे। यह सूची जब भोपाल मुख्यालय भेजी जानी थी, तभी अंतिम समय में एक अतिरिक्त नाम जोड़ा गया — और वह नाम था लेख राम साहू। इससे भी बड़ा खुलासा यह है कि साहू ने इस प्रक्रिया में साक्षात्कार तक नहीं दिया, जबकि बाकी 29 अभ्यर्थियों ने इंटरव्यू देकर ही स्थान पाया था।नियमों के अनुसार, इस भर्ती में वही उम्मीदवार पात्र थे जिन्होंने कम से कम दो वर्ष किसी मान्यता प्राप्त स्कूल में अध्यापन कार्य किया हो। लेकिन दस्तावेज़ बताते हैं कि लेख राम साहू ने कभी भी किसी स्कूल में अध्यापन नहीं किया था। इसके बावजूद उनका नाम अंतिम सूची में जोड़ दिया गया। यह सीधा-सीधा नियमों का उल्लंघन है और चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता का प्रमाण है।

बाद में मामले को ढकने के लिए यह प्रचारित किया गया कि यह चयन “मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कोटे” से हुआ है। किंतु संबंधित अभिलेखों में इसका कोई प्रमाण नहीं मिला। यह संकेत देता है कि पूरा मामला फर्जी सिफारिश, राजनीतिक दबाव और विभागीय मिलीभगत का परिणाम था।स्थानीय शिक्षाविदों और नागरिकों का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का चयन नहीं, बल्कि उस दौर के सिस्टम का काला चेहरा है, जिसने योग्य और मेहनती अभ्यर्थियों का हक छीन लिया। जनता की मांग है कि शासन इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच करवाए और जिन अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध हो, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने कहा कि



