अवैध समता कॉलोनी की खबर के बाद संवाददाता को “देख लेने” की धमकी!

डौंडीलोहारा में प्रशासनिक दादागिरी का खुलासा?
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला—खासकर डौंडीलोहारा—इन दिनों एक चौंकाने वाले आरोप की वजह से चर्चा में है। पत्रकारिता, जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, उसी पर अब सवाल उठाने वालों को नहीं, बल्कि सत्य दिखाने वालों को धमकाया जा रहा है—ऐसा पत्रकारों का आरोप है।
आरोप क्या है?
डौंडीलोहारा क्षेत्र में अवैध रूप से विकसित हो रही समता कॉलोनी के मुद्दे पर रिपोर्टिंग करने के बाद एक पत्रकार ने दावा किया कि नायब तहसीलदार दीपक चंद्राकर ने उन्हें धमकी भरा कॉल किया।
पत्रकार का आरोप है कि मोबाइल नंबर 088393 00735 से 1:14 PM पर कॉल आया, जिसमें “देख लेने” जैसी चेतावनी दी गई।
यह आरोप जितना गंभीर है, उतना ही चिंताजनक भी।
सवाल उठते हैं—
जब प्रशासन स्वयं अधिकारियों को “सिविल संहिता के आचरण नियमों” का पालन करवाने की बात करता है, तब उसी प्रशासन का एक अधिकारी पत्रकारों को डराने की कोशिश क्यों कर रहा है?क्या बालोद जिले में अब सच दिखाने की कीमत धमकी है?
क्या अवैध कॉलोनियों पर खबर रोकने के लिए अधिकारी अब दमन का रास्ता चुनेंगे?
पत्रकारों की चिंता—
मीडिया समुदाय का कहना है कि यह घटना लोकतंत्र पर सीधा हमला है। पत्रकारों ने सवाल किया:
यदि आज एक पत्रकार को धमकी मिलती है, तो कल कौन सुरक्षित रहेगा?
क्या प्रशासनिक अधिकारी क़ानून से ऊपर हैं?
क्या अवैध कामों को उजागर करने की सजा धमकी है?
आगामी खतरा?
पत्रकारों का कहना है कि “यदि अभी यह स्थिति है, तो आने वाले वर्षों में बालोद जिले में स्वतंत्र पत्रकारिता करना और भी खतरनाक हो जाएगा।”
मांग क्या है?
आरोपी अधिकारी के व्यवहार की निष्पक्ष जांच
प्रशासन से पारदर्शी कार्रवाई
पत्रकार सुरक्षा को लेकर स्पष्ट नीति
पत्रकारों ने यह भी कहा कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं है—यह पूरे मीडिया समुदाय की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र अधिकारों का प्रश्न है।
प्रशासन को तय करना होगा—छत्तीसगढ़ में क़ानून चलेगा या अधिकारियों की मनमानी?
पत्रकार चुप होंगे या सच बोलने पर धमकियां मिलती रहेंगी?
यदि आप प्रेस स्वतंत्रता के साथ खड़े हैं, तो इस मुद्दे को आगे बढ़ाएं।



