हमर छत्तीसगढ़

बालोद जिला में डौंडीलोहारा के मौन जुलूस की बुलन्द आवाज़

प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद की मौन शहर मार्च पर कविता

डौंडीलोहारा नगर की राहों पर,एक सन्नाटा गूँज उठा,
प्रशासन की सुप्तावस्था पर,सवालों का दीपक जल उठा।

प्रेस रिपोर्टर क्लब के संग,क़लमकारों का काफ़िला चला,
न बोल उठे न होंठ खुले,पर सच का ध्वज उच्च खिला ।

तख्तियों पर लिखे शब्द थे,जन-मन की पीड़ा का सार।
सौ लोगों की कदमों ने मिलकर,रचा बदलाव का अधिकार।

पत्रकार, समाज प्रमुख,साहित्यकार, अधिवक्ता संग,
मौन में भी गूँज उठे स्वर,“जागो, जिम्मेदारों! बदलो रंग।”

यह रैली कभी खतम होगी,मौन आवाज़ें पुकार उठेगा।
खौफ भरी उनकी चुप्पी भी,जनहित में हुंकार उठेगा।

लोहारा की पथरीली राहों में,चला मौन संदेश,
सुप्त पड़े हुए प्रशासन को,जागने का आदेश।

पत्रकार समाजसेवी संग,साहित्यकार वकील।
तख्ती पर लिखी पुकारें,ठोंकी व्यवस्था में कील।

मौन जुलूस ये बतलाता है,जाग प्रशासन, सुनो पुकार!!!
जन के मन की भट्ठी में तपती,सच्चाई को क्यों मारी कटार!!!

सुप्त प्रशासन जगाने निकला,सत्य-दीप का अंगारा।
बालोद जिले के सभी ब्लाक में,चलेगा मौन संदेश हमारा।यह था नहीं जुलूस किसी का,जन-जन के आशा का दीप।

मौन में डमरू जैसा बजता,अन्यायी होता भयभीत।

 

डॉ.अशोक आकाश

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