मनीराम के सिस्टम की मनमानी का नया पता अन्नूटोला जहां धमकी का रूप नोटिस है

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के अंतिम छोर पर बसे ग्राम अन्नूटोला थाना मंगचुवा में जो कुछ हो रहा है वह सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं यह उस पूरे सिस्टम का काला चेहरा है जो जनता के टैक्स पर पलता है लेकिन जनता को ही कुचलने का हथियार बन जाता है। पत्र क्रमांक 273 दिनांक 04 सितंबर 2025 इसका सबसे ताजा और शर्मनाक सबूत है जिसमें बिना किसी विवरण बिना अवधि बिना गणना बिना तकनीकी रिपोर्ट के एक महिला को 1 लाख 63 हजार 320 रुपये जमा करने का फरमान थमा दिया गया। यह नोटिस नहीं खुल्लमखुल्ला धमकी है यह आदेश नहीं विभागीय गुंडागर्दी है।सवाल सिर्फ एक है आखिर किस आधार पर यह रकम ठोंकी गई। किस महीने का बिल है। किस अवधि की बिजली चोरी मानी गई। कौन सी जांच रिपोर्ट है। कौन सा मीटर रीडिंग है। कुछ नहीं। बस एक लाइन लिख दो और गरीब आदमी की कमर तोड़ दो। यही है हमारा सुशासन। यही है हमारा डिजिटल इंडिया।
यह कोई साधारण उपभोक्ता नहीं एक महिला है जिसे डौंडीलोहारा के अधिकारी मनीराम तारम और बालोद संभाग के हेड एस के बंड ने लगातार मानसिक प्रताड़ना का शिकार बनाया है। बार बार जांच का डर दिखाना बार बार धमकी देना बार बार बिजली काटने की धमकी देना यह सब अब इन अधिकारियों का शौक बन गया है। पहली जांच में कुछ नहीं निकला तो दूसरी जांच में मनगढ़ंत कहानी गढ़ दी गई।पहली जांच में 2 गुणा 2 एचपी का ब्लोअर और 400 वॉट की हैलोजन लाइट दोनों पॉलीथीन में पैक हालत में मिले। न कनेक्शन से जुड़े थे न चल रहे थे न बिलिंग में कोई हिस्सा था। मतलब साफ था कोई चोरी नहीं। लेकिन जब सच इन अधिकारियों के अहंकार में नहीं समाया तो नई स्क्रिप्ट लिखी गई। 03 सितंबर 2025 को दूसरी जांच में अचानक डायरेक्ट हुकिंग का आरोप लगा दिया गया। वही सामान जो आज भी पैक पड़ा है उस पर चोरी का ठप्पा लगा दिया।अब सवाल यह है कि पहली बार के अधिकारी अंधे थे या दूसरी बार मनीराम तारम और संतोष बंड का कथित तौर पर अवैध उगाही के रिश्वत ने आंखें खोल दिया। इतना दूरस्थ गांव जहां बिजली विभाग के कर्मचारी मुश्किल से एक बार टीम बनाकर जाते हैं वहां एक महिला को इस तरह निशाना बनाना साफ साफ बदले की कार्रवाई लगती है।क्या यही है छत्तीसगढ़ मॉडल। जहां अधिकारी अपनी नाकामी छिपाने के लिए गरीब औरत को कुचल दें। जहां बिना सबूत के लाखों का बिल थमा दो और कहो कि कोर्ट जाओ। कोर्ट जाने की हैसियत ही कहां है इन गरीबों की। यही तो इन अधिकारियों की ताकत है कि गरीब चुप रहेगा डरेगा और अंत में हार मान लेगा।यह मामला अकेला नहीं है। बालोद डौंडीलोहारा और पूरे संभाग में ऐसी सैकड़ों शिकायतें दबी पड़ी हैं। जहां जांच का मतलब सच निकालना नहीं बल्कि जेब भरना या ऊपर वालों को खुश करना होता है। मनीराम तारम और संतोष बंड जैसे अधिकारी अब विभाग की नहीं अपनी दुकान चला रहे हैं।
जनता अब पूछ रही है पहले जांच में सब साफ था तो दूसरी जांच में डायरेक्ट हुकिंग कहां से आ गई जो सामान आज भी पैक पड़ा है उसकी चोरी कैसे हो सकती है क्या इन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी या फिर इन्हें खुला छोड़कर गरीबों को कुचलने दिया जाएगा अन्नूटोला की यह औरत अकेली नहीं लड़ रही। यह पूरी जनता की लड़ाई है। अगर आज हम चुप रहे तो कल यही नोटिस हमारे दरवाजे पर होगा। अब समय है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो। मनीराम तारम और संतोष बंड जैसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। विभाग को जवाब देना होगा कि वह जनता का सेवक है या लुटेरा।अन्नूटोला ने पूरे प्रदेश को जगाया है। अब या तो सिस्टम सुधरेगा या जनता इसे सुधारने सड़क पर उतरेगी। अब चुनाव नजदीक हैं जनता सब याद रखती है।



