हिमांशु मिश्रा का खेल से पहले लूट मालीघोरी जंबूरी में सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद का प्रशासन पर तीखा प्रहार

बालोद:- छत्तीसगढ़ में जिला बालोद के ग्राम मालीघोरी में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय रोवर–रेजर जंबूरी अब आयोजन कम और प्रशासनिक घपला का सुनियोजित भ्रष्टाचार और नियमों की शवयात्रा अधिक नजर आने लगा है। इस पूरे मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने बेहद तीखे और कठोर शब्दों में जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और आयोजन से जुड़े अधिकारियों पर हमला बोला है। उनका कहना है कि यह मामला केवल अनियमितता नहीं, बल्कि खुलेआम सरकारी धन की लूट और कानून को पैरों तले रौंदने की साजिश है।मोहन निषाद का आरोप है कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जेम पोर्टल पर जारी टेंडर की समय-सीमा 20 दिसंबर शाम 5:30 बजे तय होने के बावजूद उससे पहले ही निर्माण कार्य शुरू कर देना इस बात का पुख्ता सबूत है कि ठेका पहले से तय था। जेम पोर्टल, निविदा, समिति और नियम केवल जनता और ठेकेदारों की आंखों में धूल झोंकने का हथकंडा थे। यह न केवल वित्तीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी प्रक्रिया के साथ खुला मजाक है।उन्होंने इसे सामान्य वित्तीय नियम (GFR), छत्तीसगढ़ वित्तीय नियम, और जेम पोर्टल की अनिवार्य शर्तों का घोर उल्लंघन बताते हुए कहा कि यदि कानून वास्तव में जिंदा है, तो यह मामला सीधे आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 व 13 के तहत अपराध बनता है। मोहन निषाद के शब्दों में, “यह आयोजन नहीं, बल्कि सरकारी खजाने पर सुनियोजित डाका है।”सामाजिक कार्यकर्ता ने सबसे तीखा हमला इस आयोजन के नोडल अधिकारी हिमांशु मिश्रा पर किया। उन्होंने कहा कि नोडल अधिकारी होकर “मुझे जानकारी नहीं” कहना जिम्मेदारी से पलायन नहीं, बल्कि अपराध में मौन सहभागिता है। जब मौके पर मशीनें चल रही थीं, मजदूर काम कर रहे थे और सामग्री उतर रही थी, तब नोडल अधिकारी की आंखों पर कौन सा पट्टा बंधा था? या फिर सब कुछ देखकर भी चुप रहना ही इस खेल का हिस्सा था?मोहन निषाद का कहना है कि यदि नोडल अधिकारी को जानकारी नहीं थी, तो यह उनकी अक्षम्यता और लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण है, और यदि जानकारी थी, तो यह सीधी मिलीभगत है। दोनों ही स्थितियों में कार्रवाई अनिवार्य है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिला स्तरीय समिति और प्रतिस्पर्धात्मक टेंडर की बात केवल कागजों तक सीमित रही। अन्य ठेकेदारों को झूठी उम्मीद में फंसाया गया, जबकि असली खेल पर्दे के पीछे पहले ही तय हो चुका था। यह व्यवस्था की नैतिक दिवालियापन की पराकाष्ठा है।मोहन निषाद ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि इस मामले को दबाने की कोशिश की गई, तो यह साफ संदेश जाएगा कि जिले में कानून नहीं, बल्कि रसूख, दलाली और भ्रष्ट तंत्र का राज चलता है। उन्होंने उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच, दोषी अधिकारियों की निलंबन और आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मंच की आड़ में यदि इस तरह खुलेआम नियमों की हत्या होती रही, तो यह आयोजन युवाओं के चरित्र निर्माण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पतन और भ्रष्टाचार की पाठशाला बनकर इतिहास में दर्ज होगा।



