हमर छत्तीसगढ़

विकास के नाम पर जोखिम कुसुमकसा में रेलवे परियोजना पर ग्रामीणों की सशक्त चेतावनी

 

रिपोर्टर दिनेश कुमार नेताम

बालोद :- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के कुसुमकसा अंचल में प्रस्तावित रेलवे अंडरब्रिज निर्माण ने क्षेत्रवासियों की चिंता को गहरा कर दिया है। ग्रामीणों का मत है कि जिस योजना को प्रगति का प्रतीक बताकर आगे बढ़ाया जा रहा है, वह वर्तमान स्वरूप में लागू हुई तो जनसुरक्षा, आवागमन और सामाजिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। इसी आशंका को लेकर ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में नागरिकों ने कांकेर लोकसभा सांसद भोजराज नाग से मुलाकात कर उन्हें एक विस्तृत आपत्ति पत्र सौंपा।ज्ञापन सौंपने वालों में ग्राम पंचायत कुसुमकसा की सरपंच श्रीमती वेद बाई पिस्दा, भाजपा मंडल अध्यक्ष योगेंद्र सिन्हा सहित अनेक जनप्रतिनिधि और ग्रामीण शामिल रहे। उन्होंने सांसद को अवगत कराया कि कुसुमकसा से खलारी को जोड़ने वाले मुख्य संपर्क मार्ग पर रेलवे फाटक के समीप अंडरब्रिज निर्माण का स्थान चयन पूरी तरह अव्यावहारिक है। जिस स्थल पर यह संरचना प्रस्तावित है, वहां से बहुत कम दूरी पर जल निकासी का प्राकृतिक मार्ग मौजूद है, जिसके कारण बरसात के दिनों में पानी का बहाव अत्यंत तेज हो जाता है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी स्थान पर अंडरब्रिज का निर्माण किया गया, तो वर्षा ऋतु में जलभराव की स्थिति बनना लगभग तय है। इससे पैदल यात्रियों, दोपहिया व चारपहिया वाहनों के साथ-साथ स्कूली बच्चों और किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। इतना ही नहीं, आकस्मिक परिस्थितियों में एंबुलेंस या अन्य राहत सेवाओं की आवाजाही बाधित होने से गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी ग्रामीणों ने इस योजना को चिंताजनक बताया। उनका तर्क है कि अंडरब्रिज जैसे संकरे और कम रोशनी वाले स्थानों में असामाजिक गतिविधियों की संभावना बढ़ जाती है। सुनसान वातावरण के चलते विशेषकर रात के समय यह मार्ग महिलाओं, बुजुर्गों और विद्यार्थियों के लिए असुरक्षित सिद्ध हो सकता है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि ऐसा विकास, जो भय और असुविधा पैदा करे, उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।इस अवसर पर पूर्व जनपद सदस्य अनिल सुथार, मोहन हीड़को, वरिष्ठ नागरिक आत्माराम चुरेंद्र, ग्राम पंचायत के पंचगण और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। सभी ने एकमत से अंडरब्रिज के बजाय ओवरब्रिज निर्माण की मांग रखी। उनका मत था कि ओवरब्रिज से न केवल जलभराव की समस्या समाप्त होगी, बल्कि यातायात भी निरंतर और सुरक्षित बना रहेगा। साथ ही कृषि कार्य, बाजार तक पहुंच और आपात सेवाओं को भी किसी प्रकार की रुकावट नहीं आएगी।ग्रामीणों ने सांसद भोजराज नाग के समक्ष यह बात दोहराई कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, बल्कि ऐसे निर्णय के पक्षधर हैं जो दीर्घकाल में क्षेत्र के हित में हो। उन्होंने आग्रह किया कि प्रस्तावित स्थल का दोबारा तकनीकी मूल्यांकन कराया जाए और स्थानीय नागरिकों से संवाद स्थापित कर ही अंतिम निर्णय लिया जाए।ग्रामीणों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए सांसद भोजराज नाग ने आश्वस्त किया कि जनहित सर्वोपरि है और किसी भी योजना को लागू करने से पहले उसके सामाजिक व व्यावहारिक पहलुओं पर विचार किया जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों से चर्चा कर संतुलित समाधान निकालने का भरोसा दिलाया।क्षेत्रवासियों को विश्वास है कि उनकी सामूहिक आवाज को महत्व मिलेगा और कुसुमकसा में ऐसा निर्णय लिया जाएगा, जो सुरक्षित आवागमन, सामाजिक संतुलन और वास्तविक विकास का मार्ग प्रशस्त करे।

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