खबर का वार, भ्रष्टाचार पर प्रहार — प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद की सतत निगरानी से हिला तंत्र, जंबूरी का टेंडर निरस्त”

बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिला के ग्राम मालीघोरी में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय रोवर–रेजर जंबूरी को लेकर उठे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के तूफान ने आखिरकार प्रशासन को झुकने पर मजबूर कर दिया है। टेंडर प्रक्रिया से पहले ही निर्माण कार्य शुरू होने जैसे गंभीर आरोपों के बाद अब टेंडर को निरस्त किया जाना इस बात का प्रमाण है कि मामला केवल “आरोप” नहीं, बल्कि सच की चिंगारी था, जिसने पूरे तंत्र की पोल खोल दी। यह कार्रवाई यूं ही नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद की सतत निगरानी, निर्भीक पत्रकारिता और मुद्दे पर लगातार दबाव का निर्णायक असर साफ दिखाई देता है।सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद द्वारा लगाए गए तीखे आरोपों के बाद जिस तरह प्रशासनिक गलियारों में खलबली मची, उसने यह सिद्ध कर दिया कि टेंडर प्रक्रिया में कुछ न कुछ गंभीर गड़बड़ी जरूर थी। यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप होता, तो टेंडर निरस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई की नौबत ही क्यों आती? टेंडर रद्द होना अपने आप में प्रशासनिक स्वीकारोक्ति है कि नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई थीं।प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद ने इस पूरे प्रकरण को केवल खबर बनाकर नहीं छोड़ा, बल्कि काजल मुद्दे की तरह ही इस मामले पर भी लगातार नजर बनाए रखी। हर मोड़ पर सवाल उठाए गए, हर बयान को कठघरे में खड़ा किया गया और हर “मुझे जानकारी नहीं” जैसे जवाब की परतें खोली गईं। यही वजह है कि दबाव बढ़ता गया और अंततः प्रशासन को पीछे हटना पड़ा।मोहन निषाद ने इसे जनता की जीत बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई साबित करती है कि संगठित भ्रष्टाचार, अफसरशाही की चुप्पी और रसूखदारों की मिलीभगत मीडिया और जनदबाव के सामने ज्यादा देर टिक नहीं सकती। उन्होंने दो टूक कहा कि टेंडर निरस्त होना केवल शुरुआत है, असली लड़ाई अब दोषियों की पहचान और उन पर कानूनी कार्रवाई की है।इस पूरे घटनाक्रम में नोडल अधिकारी हिमांशु मिश्रा की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही। टेंडर से पहले काम शुरू होना और फिर जिम्मेदार अधिकारियों का अनभिज्ञता जताना प्रशासनिक ढोंग से कम नहीं था। अब जब टेंडर रद्द हो चुका है, तो यह साफ हो गया है कि “जानकारी नहीं” वाला बयान महज जिम्मेदारी से बचने का बहाना था।प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यह मामला यहीं खत्म नहीं होगा। जिस तरह पहले काजल प्रकरण में सच्चाई को सामने लाया गया, उसी तरह इस जंबूरी घोटाले के हर पहलू की परत-दर-परत जांच की जाएगी। क्लब का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय आयोजन की आड़ में यदि सरकारी खजाने को लूटने की कोशिश की गई है, तो दोषियों को बेनकाब करना ही पत्रकारिता का धर्म है।टेंडर निरस्तीकरण ने यह साबित कर दिया है कि खबर अगर निडर हो, सवाल अगर धारदार हों और निगरानी अगर लगातार हो, तो सबसे मजबूत दिखने वाला तंत्र भी हिल जाता है। यह केवल एक टेंडर रद्द होने की खबर नहीं, बल्कि उस चेतावनी का एलान है कि बालोद में अब भ्रष्टाचार को चुपचाप पनपने नहीं दिया जाएगा।
यह जीत सिर्फ एक खबर की नहीं, बल्कि सच, संघर्ष और सजग पत्रकारिता की जीत है।



