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वाह ज़िंदगी वाह! आमापारा बागीचा में हो रहा है आत्मिक जागरण का पाँच दिवसीय महाशिविर

 

बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिला के आमापारा बागीचा में इन दिनों जीवन को नई सोच, नई ऊर्जा और सकारात्मक दिशा देने वाला एक प्रेरणादायी आयोजन हो रहा है। ब्रह्मा कुमारीज़ आत्मज्ञान, आमापारा बालोद के तत्वावधान में आयोजित “वाह ज़िंदगी वाह” पाँच दिवसीय शिविर 26 दिसंबर से 30 दिसंबर 2025 तक आत्मिक परिवर्तन की सशक्त प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है। यह शिविर केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन को गहराई से समझने और उसे श्रेष्ठ बनाने की जीवंत पहल बनकर उभर रहा है।

इस विशेष शिविर में मार्गदर्शन दे रहे हैं प्रोफेसर ई. वी. गिरीश (मुंबई), जो देशभर में प्रख्यात मोटिवेशनल स्पीकर, लाइफ कोच एवं कॉर्पोरेट ट्रेनर के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। उनके विचार, अनुभव और जीवन-दर्शन से प्रतिभागी न केवल प्रेरित हो रहे हैं, बल्कि अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचान भी रहे हैं। उनके सत्र जीवन की उलझनों को सरल दृष्टि से समझने और समाधान की ओर बढ़ने की दिशा दिखा रहे हैं।

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में मानसिक दबाव, असंतुलित भावनाएँ और संबंधों में बढ़ती दूरी आम समस्या बनती जा रही है। ऐसे समय में यह शिविर आत्मिक शांति, मानसिक स्थिरता और सकारात्मक सोच को सशक्त करने का कार्य कर रहा है। शिविर का मुख्य उद्देश्य मन, विचार और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित कर आनंदमय जीवन की अनुभूति कराना है।

शिविर के अंतर्गत तनाव मुक्त जीवन के व्यावहारिक सूत्र बताए जा रहे हैं, जिनसे प्रतिभागी दैनिक जीवन की चुनौतियों को सहजता से संभाल पा रहे हैं। संबंधों में मधुरता विषय पर दिए जा रहे सत्र पारिवारिक, सामाजिक और कार्यक्षेत्रीय रिश्तों को समझ, सम्मान और सहनशीलता से जोड़ने का संदेश दे रहे हैं। यह सिखाया जा रहा है कि सही दृष्टिकोण से ही स्थायी सुख संभव है।

“स्वास्थ्य आपके हाथों में” विषय के माध्यम से यह स्पष्ट किया जा रहा है कि मानसिक स्थिति का सीधा प्रभाव शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। सकारात्मक सोच, आत्मबल और संतुलित दिनचर्या के ज़रिये स्वस्थ जीवन की दिशा दिखाई जा रही है। साथ ही परम सत्ता का ज्ञान देकर आत्मा और परमात्मा के शाश्वत संबंध को सरल शब्दों में समझाया जा रहा है, जिससे जीवन में उद्देश्य और स्पष्टता का विकास हो रहा है।

शिविर का प्रमुख आकर्षण राजयोग मेडिटेशन बना हुआ है। यह ध्यान पद्धति बिना किसी शारीरिक कठिनाई के मन को शांत, शक्तिशाली और स्थिर बनाने का अनुभव करा रही है। राजयोग के अभ्यास से प्रतिभागियों में आत्मविश्वास, सकारात्मक ऊर्जा और आंतरिक संतुलन का संचार हो रहा है।

यह पाँच दिवसीय शिविर हर वर्ग के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहा है—चाहे विद्यार्थी हों, युवा हों, गृहिणियाँ हों, कर्मचारी हों या वरिष्ठ नागरिक। “वाह ज़िंदगी वाह” यह संदेश दे रहा है कि परिस्थितियाँ नहीं, हमारी सोच जीवन की दिशा तय करती है।

आमापारा बागीचा में हो रहा यह आयोजन आत्मिक जागरण, जीवन परिवर्तन और सच्चे सुख की ओर बढ़ने का सशक्त माध्यम बन चुका है, जहाँ हर प्रतिभागी अपने भीतर एक नई रोशनी का अनुभव कर रहा है।

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