नशे के विरुद्ध सख्त संदेश थाना सनौद पुलिस की कार्रवाई, अवैध शराब तस्करी पर करारा प्रहार

रिपोर्टर:- उत्तम साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ में नशा मुक्त समाज की दिशा में पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार सख्त और निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में बालोद जिले के पुलिस थाना सनौद द्वारा अवैध शराब के खिलाफ एक प्रभावी कार्रवाई करते हुए समाज के लिए स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया गया है। थाना सनौद पुलिस ने नगर पंचायत पलारी में मुखबीर के सूचना पर घेराबंदी कर अमृत दास एवं घासीराम बंदे को मोटरसाइकिल सहित 26 पव्वा अवैध शराब के साथ गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी गुंडरदेही से धमतरी मार्ग पर, सनौद के पहले पेट्रोल पंप के पास स्थित मंडल ढाबा के कर्मचारी बताए जा रहे हैं तथा यह शराब ढाबा के लिए ले जाई जा रही थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(1) के तहत वैधानिक कार्रवाई की है। यह पूरी कार्रवाई पुलिस महानिदेशक (DGP) छत्तीसगढ़ अरुण देव गौतम, पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज रामगोपाल गर्ग, पुलिस अधीक्षक बालोद योगेश पटेल के स्पष्ट निर्देशों एवं सख्त नीति का परिणाम है, जिनका उद्देश्य नशे की जड़ों पर प्रहार कर समाज को सुरक्षित और स्वस्थ बनाना है।यह तथ्य अपने आप में बेहद चिंताजनक है कि एक ढाबा, जो आम तौर पर यात्रियों, परिवारों और आम नागरिकों की सुविधा के नाम पर संचालित होता है, उसके कर्मचारी अवैध शराब की तस्करी जैसे गंभीर अपराध में लिप्त पाए गए। मंडल ढाबा का नाम इस मामले में सामने आना केवल एक संयोग नहीं, बल्कि उस मानसिकता की ओर इशारा करता है जिसमें व्यवसाय की आड़ लेकर कानून, सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों को खुलेआम ताक पर रखा जा रहा है। ऐसे ढाबे न केवल नियमों की अवहेलना करते हैं, बल्कि नशे को बढ़ावा देकर समाज को भीतर से खोखला करने का काम करते हैं।
मंडल ढाबा जैसे प्रतिष्ठान यदि अवैध शराब की आपूर्ति का माध्यम बनते हैं तो यह सीधे-सीधे युवाओं को नशे की ओर धकेलने, सड़क सुरक्षा को खतरे में डालने और अपराध को बढ़ावा देने वाला कृत्य है। यह आचरण दर्शाता है कि मुनाफे की अंधी दौड़ में कुछ लोग समाज के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने से भी नहीं चूकते। ऐसे स्थान धीरे-धीरे सामाजिक अपराध के केंद्र बन जाते हैं, जहां कानून का भय समाप्त हो जाता है और गलत गतिविधियां सामान्य समझी जाने लगती हैं।
पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने अपने संदेश में कहा कि
“नशा केवल कानून व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक पतन का कारण है। अवैध शराब का निर्माण, परिवहन और विक्रय किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस को स्पष्ट निर्देश हैं कि ऐसे तत्वों पर कठोरतम कार्रवाई करें।”
आईजी दुर्ग रेंज रामगोपाल गर्ग ने कहा कि
“दुर्ग संभाग में नशे के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति लागू है। चाहे आरोपी किसी भी स्तर पर हो, कानून से ऊपर कोई नहीं है। ढाबा, होटल या सार्वजनिक स्थानों पर अवैध शराब की आपूर्ति करने वालों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है।”यह बयान उन सभी ढाबा संचालकों और कर्मचारियों के लिए सीधी चेतावनी है जो खाने-पीने के व्यवसाय की आड़ में नशे के कारोबार को फलने-फूलने का अवसर दे रहे हैं। ऐसे लोग न केवल कानून तोड़ रहे हैं, बल्कि समाज के भरोसे के साथ भी विश्वासघात कर रहे हैं।
एसपी बालोद योगेश पटेल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि
“युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त में धकेलने वाले लोग समाज के दुश्मन हैं। अवैध शराब से जुड़े नेटवर्क को जड़ से समाप्त किया जाएगा। आम नागरिक भी पुलिस का सहयोग करें, सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।”यह संदेश उन सभी अवैध नेटवर्क के लिए है जो ढाबों, होटलों और सार्वजनिक स्थानों को नशे का अड्डा बनाकर समाज में जहर घोल रहे हैं। ऐसे कृत्य किसी भी रूप में माफ करने योग्य नहीं हैं।
थाना प्रभारी सनौद दुलार सिंह यादव ने बताया कि
“क्षेत्र में लगातार पेट्रोलिंग और मुखबिर तंत्र के माध्यम से निगरानी की जा रही है। यह कार्रवाई उसी का परिणाम है। भविष्य में भी अवैध शराब के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा।”यह कार्रवाई केवल कानून का पालन नहीं, बल्कि समाज के प्रति पुलिस की जिम्मेदारी का परिचायक है। नशा परिवारों को तोड़ता है, अपराध को जन्म देता है और आने वाली पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय करता है। मंडल ढाबा जैसे मामलों का उजागर होना इस सच्चाई को सामने लाता है कि यदि समय रहते सख्ती न बरती जाए, तो ऐसे प्रतिष्ठान सामाजिक पतन के प्रतीक बन जाते हैं।
सनौद पुलिस की यह पहल स्पष्ट संदेश देती है कि नशे के खिलाफ लड़ाई में पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस संघर्ष में समाज की सहभागिता अनिवार्य है। नशा नहीं, स्वस्थ जीवन और सुरक्षित समाज—यही इस कार्रवाई का मूल उद्देश्य और सार्थक संदेश है।



