गुजरात अध्ययन भ्रमण इतिहास, आस्था, लोकतंत्र और प्रकृति से साक्षात्कार — मीना साहू का एक अविस्मरणीय यात्रा

बालोद:- गुजरात की धरती केवल भौगोलिक सीमाओं तक सिमटी नहीं है, बल्कि यह इतिहास, आस्था, संस्कृति, लोकतंत्र और प्रकृति के विराट स्वरूप को अपने भीतर समेटे हुए है। छत्तीसगढ़ राज्य के जनसंपर्क विभाग के मार्गदर्शन में महिला पत्रकारों का यह अध्ययन भ्रमण न केवल एक यात्रा था, बल्कि अनुभवों का ऐसा संगम था, जिसने सोच को विस्तार और दृष्टि को गहराई दी। इस प्रेरक यात्रा का साक्षी बनीं मीना साहू बालोद के छोटे से गांव मेढकी की है, जिनके लिए यह भ्रमण जीवन के सबसे स्मरणीय अध्यायों में से एक रहा।
15 जनवरी
अहमदाबाद — प्रकृति की रंगीन सांसें यात्रा की शुरुआत अहमदाबाद के नेशनल फ्लावर पार्क से हुई। रंग-बिरंगे फूलों की खुशबू और सुव्यवस्थित हरियाली ने यह संदेश दिया कि प्रकृति के साथ सामंजस्य ही सतत विकास का मूल मंत्र है। यह स्थल केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि पर्यावरण चेतना का जीवंत उदाहरण है।
16 जनवरी
लोकतंत्र, विरासत और आध्यात्म का संगम
इस दिन गुजरात विधानसभा का दौरा विशेष महत्व का रहा। छत्तीसगढ़ की महिला पत्रकारों को गुजरात राज्य के जनसंपर्क अधिकारियों से संवाद का अवसर मिला। विधानसभा का हर कोना लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती को दर्शाता है।साथ ही सिदी सैयद मस्जिद, हाथीसिंह जैन मंदिर, अडालज बावड़ी और अक्षरधाम मंदिर जैसे स्थलों ने स्थापत्य कला, धार्मिक सहिष्णुता और आध्यात्मिक चेतना की गूढ़ झलक दिखाई। ये स्थल यह बताते हैं कि गुजरात विविधताओं में एकता का जीवंत उदाहरण है।
17 जनवरी
साबरमती — जहां विचारों ने क्रांति की साबरमती आश्रम का भ्रमण आत्मा को छू लेने वाला अनुभव रहा। गांधीजी का जीवन, उनका संयम, सत्य और अहिंसा का मार्ग आज भी उतना ही प्रासंगिक है। दांडी यात्रा से लेकर धरना स्थलों तक का अवलोकन करते हुए यह एहसास हुआ कि परिवर्तन के लिए हथियार नहीं, विचार चाहिए।
18 जनवरी
द्वारका और नागेश्वर — आस्था का शिखर द्वारिकाधीश और नागेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन ने श्रद्धा को नई ऊर्जा दी। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, जहां भगवान शिव नाग रूप में पूजित हैं,जीवन रक्षा और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है। यह स्थल शिव पुराण की कथाओं को सजीव करता है।
19–20 जनवरी
पोरबंदर — कृष्ण और गांधी की भूमि श्री हरि मंदिर और सांदीपनि विद्यानिकेतन ने भगवान कृष्ण के शिक्षण संस्कारों की याद दिलाई। वहीं महात्मा गांधी का जन्मस्थल देखने का अवसर इतिहास से साक्षात्कार जैसा था। वह घर आज भी सादगी, त्याग और राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा देता है।
20–21 जनवरी
सोमनाथ — आस्था, संघर्ष और पुनर्निर्माण का प्रतीक
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की संध्या आरती और साउंड एंड लाइट शो ने इतिहास के उत्थान-पतन को जीवंत कर दिया। अभिषेक का सौभाग्य आत्मिक शांति से भर देने वाला था। त्रिवेणी संगम ने मोक्ष की अवधारणा को और गहराया।गिर वन — प्रकृति की गर्जना एशियाई शेरों की धरती गिर वन राष्ट्रीय उद्यान प्रकृति के अद्भुत संतुलन का उदाहरण है। टीकवुड गिर फॉरेस्ट रिसॉर्ट में प्रवास ने यह दिखाया कि विकास और संरक्षण साथ चल सकते हैं।
22 जनवरी अनुभव के साथ वापसी
राजकोट से मुंबई और फिर रायपुर लौटकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात, इस यात्रा का सार प्रस्तुत करने का अवसर बना। यह भ्रमण केवल देखने का नहीं, समझने और सीखने का माध्यम बना।यह अध्ययन भ्रमण मै मीना साहू, सहित सभी महिला पत्रकारों के लिए प्रेरणा, ऊर्जा और जिम्मेदारी का नया अध्याय है — जहां कलम और संवेदना, दोनों और मजबूत होकर निखरेगा
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महिला पत्रकारों के अध्ययन भ्रमण को अत्यंत सराहनीय बताते हुए कहा कि ऐसे शैक्षणिक और सांस्कृतिक भ्रमण पत्रकारों की दृष्टि को व्यापक बनाते हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात जैसे विकासशील और ऐतिहासिक राज्य के प्रशासनिक मॉडल, लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक स्थलों का प्रत्यक्ष अनुभव पत्रकारिता को और अधिक जिम्मेदार, संवेदनशील एवं तथ्यपरक बनाता है। मुख्यमंत्री ने महिला पत्रकारों की सक्रिय भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज निर्माण में उनकी लेखनी की शक्ति महत्वपूर्ण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस भ्रमण से प्राप्त अनुभव छत्तीसगढ़ के विकास, संस्कृति और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने में सहायक होंगे।
22 जनवरी को रायपुर लौटकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से हुआ संवाद मेरे लिए सबसे भावनात्मक क्षण रहा। एक साधारण ग्रामीण पत्रकार की बातों को गंभीरता से सुनना और प्रोत्साहित करना मेरे आत्मविश्वास को नई ताकत दे गया। यह अनुभव मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बन गया।इस पूरी यात्रा के लिए मैं बालोद कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, जिला जनसंपर्क अधिकारी चंद्रेश ठाकुर एवं राज्य जनसंपर्क कार्यालय रायपुर का भी हृदय से धन्यवाद करती हूं। यह अनुभव मुझे हमेशा याद दिलाता रहेगा कि जब अवसर मिलते हैं, तो सपने सच में बदल जाते हैं।



