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कोहंगाटोला का रंग, राष्ट्रीय कैनवास पर बालोद की पहचान — साहित्यकार डॉ. अशोक आकाश के पुत्र अविरल कृष्ण साहू ने बढ़ाया जिले का मान

 

बालोद:- छत्तीसगढ़ के रायपुर में अखिल भारतीय राष्ट्र रंग संघ साधना के सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सरोना स्थित ठाकुर विघ्नहरण सिंह राजपूत भवन में आयोजित भव्य चित्रकला कार्यशाला में जब देशभर के कलाकार अपने-अपने रंग और रेखाओं से राष्ट्रभाव उकेर रहे थे, उसी सृजनशील माहौल में बालोद जिले के कोहंगाटोला गांव के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. अशोक आकाश के सुपुत्र युवा चित्रकार अविरल कृष्ण साहू की सहभागिता विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कर रही थी। उनकी उपस्थिति ने न केवल आयोजन को गरिमा दी, बल्कि बालोद जिले का नाम राष्ट्रीय कला मंच पर गर्व से स्थापित किया।आठ राज्यों से आए अस्सी कलाकारों के बीच अविरल कृष्ण साहू का आत्मविश्वास, एकाग्रता और रचनात्मक दृष्टि यह दर्शा रही थी कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती। कोहंगाटोला जैसे ग्रामीण परिवेश से निकलकर अखिल भारतीय स्तर की इस कार्यशाला में सहभागिता करना स्वयं में एक प्रेरक उपलब्धि है। उनके कैनवास पर उभरते दृश्य लोक जीवन, परंपरा और समकालीन चेतना का सशक्त समन्वय प्रस्तुत कर रहे थे।राष्ट्र रंग संघ साधना के सौ वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित इस कार्यशाला में प्रस्तुत एक सौ एक चित्रों के बीच अविरल कृष्ण साहू का कार्य अपनी सादगी और भावनात्मक गहराई के कारण अलग पहचान बना रहा था। उनके चित्रों में मिट्टी की सौंधी खुशबू, गांव की सहजता और संस्कृति के प्रति गहरा सम्मान झलकता था।यह चित्र केवल देखने का विषय नहीं थे, बल्कि दर्शकों को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम बन रहे थे।कार्यशाला के दौरान जब अंतर्राष्ट्रीय चित्रकार पद्मश्री वासुदेव कामत ने चित्रकला को जीवन का रंग बताया, तो अविरल जैसे कलाकार उस विचार के सजीव उदाहरण प्रतीत हुए। उनके लिए चित्र बनाना मात्र अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन को समझने और व्यक्त करने की साधना है। यही साधना उन्हें भीड़ से अलग करती है और पहचान दिलाती है।बालोद जिले के लिए यह सहभागिता गौरव का विषय रही। अविरल कृष्ण साहू ने यह सिद्ध कर दिया कि जिले की युवा पीढ़ी में अपार संभावनाएं हैं और सही मंच मिलने पर वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहरा सकती हैं। उनकी यह उपलब्धि कोहंगाटोला के युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है, जो सपनों को सच करने का साहस रखते हैं।यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि इस अखिल भारतीय चित्रकला कार्यशाला में अविरल कृष्ण साहू की सहभागिता ने बालोद को पहचान, सम्मान और आत्मविश्वास दिया। रंगों की इस यात्रा में उन्होंने जिले के मान को नई ऊंचाई तक पहुंचाया और यह संदेश दिया कि कला की कोई सीमा नहीं होती—केवल समर्पण और दृष्टि चाहिए।

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