पूज्य माताजी स्वर्गीय श्रीमती कुसुम सिन्हा की स्मृति में श्रद्धा, शांति और आत्मीयता से सम्पन्न शांति हवन

बालोद:- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की पूज्य माताजी कुसुम सिन्हा (10 जुलाई 1942 – 15 फरवरी 2026) की पुण्य स्मृति में उनके शासकीय आवास, उच्च न्यायालय आवासीय परिसर बोदरी, बिलासपुर में श्रद्धा, शोक और आध्यात्मिक भावनाओं से परिपूर्ण शांति हवन का आयोजन किया गया। वातावरण में भक्ति, आदर और आत्मीयता का ऐसा संगम था मानो हर उपस्थित व्यक्ति अपनी श्रद्धा से उस दिवंगत आत्मा को प्रणाम कर रहा हो।
वैदिक आचार्यों के मधुर मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न हुए हवन ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। अग्नि की पवित्र लौ के साथ उपस्थित जनों ने दिवंगत आत्मा की शांति, मोक्ष और परमधाम की प्राप्ति हेतु प्रार्थना की। इसके पश्चात आयोजित भजन संध्या में गूँजते भक्ति गीतों ने भावनाओं को और भी कोमल बना दिया। शोक सभा में सभी ने मौन धारण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए, और वातावरण कुछ क्षणों के लिए पूरी तरह शांत होकर स्मृतियों में डूब गया।
सभा में वक्ताओं ने माताजी के जीवन का स्मरण करते हुए बताया कि वे सादगी, संस्कार और पारिवारिक समर्पण की सजीव प्रतिमूर्ति थीं। उनके जीवन में प्रेम था, संयम था, और अपनेपन की वह ऊष्मा थी जो हर मिलने वाले को अपनत्व का अनुभव कराती थी। उनके स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद ने सदैव कर्तव्यनिष्ठा, सत्यनिष्ठा तथा सेवा के पथ पर चलने की प्रेरणा दी। कहा गया कि माँ का आशीष शरीर से भले दूर हो जाए, पर उसकी छाया जीवन भर संबल बनकर साथ चलती है।
इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रदेश के अनेक विशिष्ट जन उपस्थित रहे। इनमें विष्णुदेव साय, तोखन साहू, गजेंद्र यादव, रमेश बैस तथा सुशांत शुक्ला सहित उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीशगण, महाधिवक्ता, पुलिस महानिदेशक, उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी, रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री के अधिकारी, न्यायिक अकादमी व विधिक सेवा संस्थाओं के सदस्य, जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, न्यायालय कर्मचारी तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
पूरे आयोजन में शोक के साथ-साथ कृतज्ञता की भावना भी स्पष्ट दिखाई दी — एक ऐसे जीवन के प्रति, जिसने अपने संस्कारों से परिवार ही नहीं, समाज को भी समृद्ध किया। श्रद्धा, स्मृति और आत्मीयता से भरा यह कार्यक्रम दिवंगत माताजी के प्रति प्रेमपूर्ण नमन बनकर सबके हृदयों में लंबे समय तक अंकित रहेगा।



