हमर छत्तीसगढ़

सरकार का शराब वैध, पुलिस के लिए अवैध लाने वालों का धड़पकड़, पीने वालों को सुशासन सरकार

 

रिपोर्टर:- उत्तम साहू 

बालोद / पलारी : छत्तीसगढ़ प्रदेश के सुशासन सरकार द्वारा प्रदेश में पग पग पर वैध रूप से सरकारी शराब दुकान चलाने के साथ ग्राहकों की सुविधा के लिए प्रति ग्राहक एक बार में 15 पौव्वा खरीद सकते है। जिले के विकासखंड गुरूर अंतर्गत गुरूर, करहीभदर एवं अराकर में सरकारी शराब दुकान है, जहां से ग्रामीण अपने घरों में आयोजित सगाई, शादी, छट्टी, जन्म दिवस आदि सहित त्यौहारों के लिए इन सरकारी दुकानों से शराब खरीद कर अपने गांव ले जाते है। विकासखंड गुरूर अंतर्गत पुलिस थाना वालों गिद्ध नजर लगाकर इन वैध शराब लाने वालों को पकड़कर अवैध शराब बेचाई करने वाला बताकर अपराध दर्ज कर जेल का भी दर्शन करा देते हैं, इसके विपरित गांव, पानठेला, अंडा आमलेट, रोल बेचने वाले, होटल, ढाबों आदि में सही में अवैध रूप से शराब बेचने वाले पुलिस वालों की नजर में अच्छे लोग है क्योंकि ये कथित अच्छे लोग अपने जीवनदायनी होटल, ढाबों आदि में अवैध शराब बेचने का लायसेंस इन्ही थानों से प्राप्त करते है।

इसी दोहरे चरित्र ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश की आग भड़का दी है। एक ओर सरकार राजस्व के नाम पर शराब बेचकर खजाना भर रही है, दूसरी ओर वही शराब घर ले जाने वाला ग्रामीण अपराधी बना दिया जाता है। यह व्यवस्था नहीं, खुला अन्याय है। कानून का डंडा उन पर चल रहा है जो नियम से खरीदते हैं, जबकि खुलेआम अवैध बिक्री करने वालों पर संरक्षण की छाया बनी हुई है। यह हालात सुशासन नहीं बल्कि प्रशासनिक पाखंड का जीवंत उदाहरण बन चुके हैं।गांवों में चर्चा साफ है कि पुलिस की कार्रवाई कानून से अधिक वसूली और दबाव का हथियार बन गई है। वैध खरीदारों को रोकना आसान है, क्योंकि वे सीधे-साधे लोग हैं; लेकिन जिन ठिकानों पर सच में अवैध बिक्री हो रही है, वहां कार्रवाई करने का साहस नहीं दिखता। इससे कानून की साख कमजोर हो रही है और व्यवस्था पर भरोसा टूट रहा है। जनता पूछ रही है कि आखिर नियम जनता के लिए है या केवल डराने के लिए।

आगामी होली पर्व को देखते हुए यह मुद्दा और गंभीर हो जाता है। त्योहारों में लोग परंपरा अनुसार सामान खरीदकर घर ले जाते हैं, लेकिन अब उन्हें भय है कि रास्ते में ही उन्हें अपराधी बना दिया जाएगा। रंगों के इस पर्व से पहले ही डर का साया गांवों में फैल चुका है। यदि यही स्थिति रही तो त्योहार की खुशियां भी प्रशासनिक सख्ती और भेदभाव की भेंट चढ़ जाएंगी।जरूरत है कि शासन और पुलिस इस भेदभावपूर्ण रवैये पर तुरंत रोक लगाए, वैध खरीदारों को परेशान करना बंद करे और सच में अवैध कारोबार करने वालों पर कठोर कार्रवाई करे। अन्यथा जनता का गुस्सा सड़कों पर दिखाई देगा और सुशासन का दावा खोखला साबित होगा।

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