सत्य की ज्वाला, विकास का संकल्प दुर्गा नंद साहु का होलिका दहन पर पावन संदेश

संपादक :- मीनू साहु
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में रंगों की उमंग और आस्था की आभा के बीच होलिका दहन हमें एक गहरा संदेश देता है — अन्याय कितना भी शक्तिशाली क्यों न लगे, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने वाला प्रेरक पर्व है।इसी सकारात्मक सोच और विकास की भावना के साथ दुर्गा नंद साहु निरंतर समाज सेवा के पथ पर अग्रसर हैं। उनका संकल्प केवल पद तक सीमित नहीं, बल्कि जनकल्याण के हर कार्य में सक्रिय सहभागिता है। वे मानते हैं कि सच्चा नेतृत्व वही है जो जनता की अपेक्षाओं को समझे, उनकी समस्याओं को प्राथमिकता दे और समाधान के लिए प्रतिबद्ध रहे।होलिका की अग्नि हमें याद दिलाती है कि अहंकार, अत्याचार और बुराई का अंत निश्चित है। जिस प्रकार प्रह्लाद की अटूट आस्था ने उसे सुरक्षित रखा, उसी प्रकार जनविश्वास और सच्ची नीयत समाज को मजबूत बनाती है। यह पर्व हमें आत्ममंथन का अवसर देता है — हम अपने भीतर की नकारात्मकता, ईर्ष्या और वैमनस्य को त्यागें और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ें।होलिका दहन का यह पावन अवसर हमें एकजुट होने, सामाजिक समरसता बढ़ाने और क्षेत्र के विकास हेतु सामूहिक प्रयास करने की प्रेरणा देता है। जब समाज एक दिशा में कदम बढ़ाता है, तब परिवर्तन निश्चित होता है।आइए, इस शुभ घड़ी में हम सब मिलकर संकल्प लें —
🅰️ सत्य का साथ देंगे
🅰️अन्याय का विरोध करेंगे
🅰️विकास की राह पर कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे
यह पर्व केवल बुराई के दहन का प्रतीक नहीं, बल्कि नई शुरुआत का संकेत है। नई सोच, नई ऊर्जा और नई उम्मीदों के साथ हम अपने क्षेत्र को उन्नति की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं।दुर्गा नंद साहु आप सभी को होलिका दहन की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए यही संदेश देते हैं कि एकता, विश्वास और सकारात्मक सोच से ही समृद्ध समाज का निर्माण संभव है।आइए, सत्य की इस ज्वाला को अपने जीवन और समाज में प्रज्वलित रखें — यही होलिका दहन की सच्ची सार्थकता है!



