अटल चौक में रंगों की धूम संस्कारधानी पलारी ने मनाई होली!

रिपोर्टर:- उत्तम साहु
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में गुरुर ब्लॉक की संस्कारधानी नगर पंचायत पलारी का अटल चौक इन दिनों रंग-बिरंगे उत्साह से गूंज रहा था। होली का त्योहार यहां शांति और उमंग के साथ धूमधाम से मनाया गया, जहां बच्चे, बूढ़े और जवान सब एक साथ थिरकते नजर आए। नंगारे की थाप और डीजे की जोरदार धुनों ने पूरा माहौल बिंदास बना दिया। हवा में गुलाल की खुशबू, चेहरों पर रंगों की चमक और दिलों में भाईचारे का जज्बा – यही था पलारी की इस होली का असली रंग!उत्तम साहु ने पूरी टीम को संगठित कर आयोजन को यादगार बनाया। वे लगातार लोगों को एकजुट रखते हुए रंग खेलने और सुरक्षा का ध्यान रखते रहे। उनकी ऊर्जा ने सबको प्रेरित किया। इसी तरह रवि कोसरे ने डीजे और संगीत का जिम्मा संभाला, जिसकी वजह से माहौल ठंडा ही नहीं हुआ। रवि की चुनी हुई प्लेलिस्ट ने हर उम्र के लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। अन्य ग्रामीणों जैसे ओम प्रकाश साहू बीरबल साहू नीरज साहू जेठू मारकंडे विकास साहू विजय चौधरी संदीप साहु राकेश साहु प्रीतम साहु (तेजस्वी किराना स्टोर) सांई वस्त्रालय और कई महिलाओं ने भी मिलकर रंगों की होली को और रंगीन बनाया। सबने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि उत्सव पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे, कोई अप्रिय घटना न हो।दोपहर से ही अटल चौक पर जमघट लगना शुरू हो गया। लोग हाथों में अबीर-गुलाल लिए पहुंचे। जैसे ही नंगारे और ढोल की आवाज गूंजी, पूरी भीड़ झूम उठी। डीजे पर छत्तीसगढ़ी गीतों की बौछार हुई – “फाग गीत” से लेकर तेज बीट वाले गाने में हर कोई नाचने को मजबूर हो गया। बच्चे रंगों से लथपथ होकर दौड़ते-भागते, युवा जोश में झूमते और बुजुर्ग मुस्कुराते हुए तालियां बजाते दिखे। कोई पानी की पिचकारियां चलाता, कोई अबीर उड़ाता – हर तरफ बस मस्ती और मिलन का मेला लगा रहा।इस उत्सव में ग्रामीणों का जोश देखते ही बनता था।यह होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं थी, बल्कि एकता और खुशी का प्रतीक बनी। ग्रामीणों ने आपस में गले मिलकर पुरानी रंजिशें भुलाईं, नए रिश्ते जोड़े। अटल चौक पर लगा यह मेला पूरे इलाके के लिए मिसाल बन गया। शाम ढलते-ढलते जब रंग धुलने लगे, तो चेहरों पर वही संतुष्टि थी जो सच्चे होली मिलन से मिलती है।संस्कारधानी पलारी ने साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी में होली का रंग कितना गहरा और जोशीला होता है। यहां की होली में न कोई ऊंच-नीच, न कोई दूर-दराज – बस रंग, संगीत और प्यार! उत्तम साहु, रवि कोसरे और पूरे गांव की टीम को सलाम, जिन्होंने इस पर्व को इतना धारदार और यादगार बना दिया। अगली होली का इंतजार अब से शुरू!



