फर्जी “प्रेस क्लब” के नाम पर खेल! होली मिलन के बहाने उगाही और नियमों की धज्जियां, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

रिपोर्टर :- उत्तम साहु
बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिला के गुण्डरदेही-अर्जुन्दा क्षेत्र में खुद को “प्रेस क्लब” बताने वाले एक कथित संगठन की गतिविधियों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 15 मार्च 2026 को प्रस्तावित “होली मिलन समारोह” अब उत्सव से ज्यादा विवाद का विषय बन गया है। कलमकार निशा कुमारी ने इस पूरे मामले को लेकर दुर्ग संभाग के संभागायुक्त के समक्ष विस्तृत शिकायत प्रस्तुत करते हुए कई चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं।शिकायत में कहा गया है कि रूप चंद जैन,त्रिलोक साहु एवं अन्य द्धारा जिस संगठन के नाम पर कार्यक्रम आयोजित कर रहे है, उसका कोई प्रमाणित सरकारी पंजीकरण नहीं है। इसके बावजूद यह समूह खुद को प्रेस क्लब बताकर इलाके में सक्रिय है और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। इससे संगठन की वैधता और उसके पदाधिकारियों की भूमिका पर गंभीर संदेह खड़े हो गए हैं।सबसे बड़ा आरोप आर्थिक लेन-देन को लेकर सामने आया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि कार्यक्रम के नाम पर क्षेत्र के व्यापारियों, प्रतिष्ठानों और प्रभावशाली लोगों से भारी रकम इकट्ठा की जा रही है। सवाल यह भी उठाया गया है कि यह धन किस अधिकार से लिया जा रहा है और इसका लेखा-जोखा आखिर कहां दर्ज है। पारदर्शिता के अभाव ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है।इसके साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि जिन रसीदों के माध्यम से धन लिया जा रहा है, उनकी वैधता संदिग्ध है और उनमें कर संबंधी नियमों की अनदेखी की जा रही है। यदि ऐसा है तो यह केवल अनियमितता नहीं बल्कि वित्तीय गड़बड़ी और कर कानूनों के उल्लंघन का गंभीर मामला बन सकता है।एक और चिंता छात्रों की पढ़ाई को लेकर सामने आई है। इस समय बोर्ड परीक्षाओं का दौर चल रहा है और मुख्य बाजार चौक जैसे भीड़भाड़ वाले स्थान पर तेज ध्वनि और भीड़भाड़ से विद्यार्थियों की तैयारी प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।शिकायत में यह भी कहा गया है कि कार्यक्रम के लिए स्थानीय प्रशासन या पुलिस से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है। ऐसी स्थिति में भीड़भाड़ वाला आयोजन कानून-व्यवस्था के लिए जोखिम बन सकता है। । मीडिया कर्मी निशा कुमारी ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, संगठन की वैधता और वित्तीय गतिविधियों की पड़ताल हो तथा जब तक स्थिति स्पष्ट न हो, तब तक प्रस्तावित कार्यक्रम पर तत्काल रोक लगाई जाए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर कितना कड़ा रुख अपनाता है।



