हमर छत्तीसगढ़

जेवरतला रोड़ में सरकारी फरमान धूल फांक रहा, कब्जेदार बेखौफ घूम रहे! सरपंच और तहसीलदार सो गए है?

कलेक्टर कार्यालय से राजस्व अधिकारियों एवं संबंधित अमले को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए थे,

संपादक:- मीनू साहू 

बालोद:- जिले के ग्राम जेवरतला रोड में शासकीय भूमि, सार्वजनिक चौक-चौराहों और सामुदायिक उपयोग की जमीन पर कथित अतिक्रमण को लेकर अब प्रशासन की कार्यप्रणाली कठघरे में दिखाई देने लगी है। कलेक्टर कार्यालय से राजस्व अधिकारियों एवं संबंधित अमले को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन निर्देशों के बावजूद जमीन पर अपेक्षित परिणाम नजर नहीं आए। यही वजह है कि अब ग्रामीणों के बीच यह चर्चा तेज है कि आखिर सरकारी आदेशों का भी सरपंच और तहसीलदार धज्जी उड़ा रहे हैं सबसे ज्यादा सवाल ग्राम पंचायत में सरपंच के नेतृत्व पर उठ रहे हैं।

पंचायत का मूल दायित्व सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और ग्रामहित की रक्षा करना है। यदि गांव की साझा जमीन पर कथित कब्जे के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, तो फिर पंचायत की सक्रियता आखिर कहां गायब हो गई? क्या जिम्मेदारी निभाने के बजाय चुप्पी को ही विकल्प बना लिया गया? ग्रामीणों के मन में यह शंका भी गहराने लगी है कि कहीं अतिक्रमण धारीओ से पैसे लेकर सरपंच उन्हें बचा रही है

उधर तहसील प्रशासन की भूमिका भी गंभीर बहस का विषय बन चुकी है। सीमांकन कराना, राजस्व अभिलेखों के आधार पर तथ्य स्पष्ट करना और कानून के अनुसार कार्रवाई करना तहसील स्तर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि शिकायतें, आवेदन और उच्च स्तर से निर्देश उपलब्ध थे, तो फिर कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई? आखिर किस कारण से पूरा मामला लंबे समय तक लटका रहा? क्या राजस्व व्यवस्था का उद्देश्य केवल कागजी प्रक्रिया पूरी करना है या सरकारी आदेशों को धरातल तक पहुंचाना भी उसकी जिम्मेदारी है?

सरकारी भूमि किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होती, बल्कि पूरे गांव की साझा धरोहर होती है। यदि उस पर अतिक्रमण के आरोप हैं, तो निष्पक्ष जांच, पारदर्शी सीमांकन और विधिसम्मत कार्रवाई प्रशासन का कर्तव्य है। ऐसे मामलों में ढिलाई व्यवस्था को खोखला करती है । आखिर कानून का डंडा सभी पर समान रूप से चलेगा या फिर सिक्कों के खनक में सरकारी व्यवस्था बार-बार बेबस दिखाई देती रहेगी।

Related Articles

Back to top button