हमर छत्तीसगढ़
पहली बारिश में बह गई गुणवत्ता?
पूर्व विधायक के गांव बेलौदी की नाली ने खोल दी विकास कार्यों की परतें, आखिर किसके संरक्षण में हो रहा ऐसा निर्माण?

संपादक:- मीनू साहू
बालोद।
बालोद जिले की ग्राम पंचायत बेलौदी में हाल ही में निर्मित नाली पहली ही बारिश के बाद कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त दिखाई देने लगी है। यह दृश्य केवल एक निर्माण कार्य की कमजोरी का मामला नहीं, बल्कि सरकारी विकास कार्यों की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बेलौदी पूर्व विधायक वीरेंद्र साहू का गृह ग्राम है। ऐसे में स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि यदि एक प्रमुख जनप्रतिनिधि के गांव में ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूरस्थ गांवों में विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति क्या होगी?
स्थानीय लोगों के अनुसार, नाली का निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद उसका हिस्सा टूटने लगा। यदि यह दावा सही है, तो यह जांच का विषय है कि निर्माण में प्रयुक्त सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं? क्या सीमेंट, गिट्टी और अन्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच हुई थी? क्या विभागीय इंजीनियरों ने प्रत्येक चरण का निरीक्षण किया था, या केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी कर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई?
यह मामला केवल एक नाली का नहीं, बल्कि सरकारी धन के उपयोग की पारदर्शिता का भी है। यदि निर्माण वास्तव में मानकों के अनुरूप हुआ था, तो पहली बारिश में क्षति क्यों हुई? और यदि गुणवत्ता में कमी रही, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी—निर्माण एजेंसी, तकनीकी अमला या निगरानी तंत्र?



