जनता के दुश्मन महिला बाल विकास विभाग के लिए बालोद जिला प्रशासन भ्रष्टाचार का संरक्षक

बालोद: छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग की करतूतें भले ही घटिया हों, लेकिन उससे भी ज्यादा गंदगी है बालोद जिला प्रशासन की। 19 महीनों तक एक संविदा कर्मचारी महतारी वंदन योजना की रकम गटकती रही और अफसर ऐसे सोए पड़े रहे जैसे नशे में धुत्त हों।
कलेक्टर और विभागीय अधिकारियों की आंखें सिर्फ तब खुलती हैं जब कैमरा सामने होता है, वरना भ्रष्टाचार उनके लिए रोज़ का नाश्ता बन चुका है। जनता की मेहनत की कमाई से चलने वाली योजनाएँ यहाँ अफसरों और उनके चमचों के लिए लूट की दुकान हैं। सामूहिक विवाह योजना में करोड़ों का खेल, खरीद आदेश में हास्यास्पद गड़बड़ी और अब संविदा कर्मचारी का सालों तक पैसे चूसना—ये सबूत साफ़ कहते हैं कि बालोद का प्रशासन बेकार, निकम्मा और गिरे हुए दर्जे का हो चुका है।
यहाँ कलेक्टर की कुर्सी जिम्मेदारी निभाने के लिए नहीं, बल्कि तमाशा देखने के लिए बनी है। ज़िला अधिकारी जनता की समस्याओं पर ऐसे अनजान बनते हैं जैसे यह उनका काम ही न हो। सच्चाई यह है कि इनकी मिलीभगत के बिना कोई भी कर्मचारी महीनों तक सरकारी पैसे की लूट नहीं कर सकता। यह पूरा खेल ऊपर से नीचे तक सड़ा हुआ है और अफसरशाही इस सड़ेपन पर फूल चढ़ा रही है।
बालोद प्रशासन की हालत उस लापरवाह चौकीदार जैसी है जो खुद चोरों के साथ मिलकर घर का सामान बेच रहा हो। महतारी वंदन जैसी पवित्र योजना को इन निकम्मों ने मज़ाक बना दिया है। माताओं और बच्चों के लिए बनी राशि को यहाँ अपने जेब में भरना सामान्य बात हो गई है और अधिकारी इस पर चुपचाप पर्दा डालते रहते हैं।
अब जनता की सख्त मांग है कि इस घोटाले में शामिल संविदा कर्मचारी से लेकर विभागीय अधिकारियों तक पर तुरंत मामला दर्ज किया जाए। भारतीय न्याय संहिता (BNNS) 2023 की धारा 316 (आपराधिक विश्वासघात), धारा 318 (धोखाधड़ी), और धारा 61 (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत FIR हो। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धाराओं में भी कार्रवाई अनिवार्य है। केवल निलंबन या दिखावटी जांच नहीं, बल्कि जेल और कठोर सज़ा ही असली न्याय होगा।
अब जनता पूछ रही है—कलेक्टर महोदय, आपकी आँखें कब खुलेंगी? या फिर आप भी उसी हिस्सेदारी में शामिल हैं, जो जनता के हक को नोच-नोच कर खा रही है? बालोद जिला प्रशासन अब भरोसे का नहीं, बल्कि घृणा का प्रतीक बन चुका है। लोग अब खुलेआम कहते हैं—यहाँ भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाली अफसरशाही बैठी है, जो जिले के भविष्य को गंदगी में धकेल रही है।



