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बालोद शिक्षा विभाग का घोटाला डीएमसी ऑपरेटर गठजोड़ ने कलेक्टर की नाक के नीचे किया माल हजम

बालोद शिक्षा विभाग का घोटाला डीएमसी ऑपरेटर गठजोड़ ने कलेक्टर की नाक के नीचे किया माल हजम

बालोद:- डौंडीलोहारा ब्लॉक के निवासी सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने बताया कि छत्तीसगढ़ के बालोद जिले का समग्र शिक्षा विभाग आज सवालों के कठघरे में है। पांच सालों में करोड़ों की खरीदी करने वाले तत्कालीन डीएमसी अनुराग त्रिवेदी और डौंडीलोहारा विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने विभाग का माल ऐसे हजम किया जैसे यह उनकी पुश्तैनी जागीर हो। एसी, लैपटॉप, कुर्सी, टेबल जैसी चीजें खरीदी गईं, बिल फाइलों में चढ़ा, लेकिन सामान कार्यालय से गायब। एसी कहां लगाया गया, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। विभाग के डीईओ ने बार-बार पत्र लिखकर लैपटॉप और एसी जमा करने को कहा, मगर डीएमसी कान में तेल डालकर बैठे रहे हैं।

सबसे गंदी बात यह है कि यह खेल अकेले तत्कालीन डीएमसी और डौंडीलोहारा विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने नहीं खेला। कार्यालय का अनियमित ऑपरेटर, जो कलेक्टर दर पर काम कर रहा है, इस पूरे गोरखधंधे में शामिल है। बिना किसी एपीसी की अनुमति के, नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए खरीदी की गई। यानी विभाग का हर नियम सिर्फ कागजों में है, असल में तो जेब भरने का धंधा चल रहा है। सवाल है कि जब करोड़ों का माल इस तरह गायब हो रहा है तो आंख मूंदकर क्यों बैठे हैं? क्या प्रशासन की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी चोरी संभव है?

डीईओ खुद मान रहे हैं कि तत्कालीन डीएमसी लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों का सामान पांच साल में डकार गए। फाइलों में बिल मौजूद हैं, लेकिन एसी–लैपटॉप का अता-पता नहीं। शिक्षा विभाग बिल दिखाने से परहेज कर रहा है, क्योंकि सच बाहर आ गया तो और घोटाले उजागर होंगे। दिशा की बैठक में भी यह मुद्दा उठा, सांसद के सामने सवाल पूछे गए, लेकिन विभाग के अधिकारी बैठक से भाग खड़े हुए। यह सीधा-सीधा जनता और जनप्रतिनिधियों का अपमान है। कार्रवाई का नाम लिया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि बालोद प्रशासन के लिए भ्रष्टाचार कोई अपराध नहीं, बल्कि रोज़ की आदत है। कलेक्टर से लेकर विभागीय अधिकारी तक सब इस लूट की चुपचाप पैरवी कर रहे हैं। तत्कालीन डीएमसी अनुराग त्रिवेदी और उनके ऑपरेटर साथी व डौंडीलोहारा विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने शिक्षा विभाग को अपनी निजी दुकान बना लिया है।

बालोद का यह घोटाला अब और दबाया नहीं जा सकता। कलेक्टर अगर ईमानदार हैं तो तत्काल जांच बैठाएं, वरना यह मान लिया जाए कि वे भी इस भ्रष्टाचार के साझेदार हैं। एसी–लैपटॉप तो बस बहाना है, हकीकत में पूरा विभाग माफिया की तरह चल रहा है। जनता अब चुप नहीं बैठेगी, इस गंदगी को हर हाल में सड़क पर उछाला जाएगा। इस पूरे घृणित कृत्य में भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (लोकसेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात), धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 467, 468, 471 (जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग) तथा धारा 120B (आपराधिक षड्यंत्र) स्पष्ट रूप से लागू होती हैं।

साल 2021-22 में समग्र शिक्षा विभाग में तत्कालीन डीएमसी अनुराग त्रिवेदी ने
कुछ सामग्रियां खरीदी थी। इसमें एसी भी थी, जिसका कोई पता नहीं है। वहीं शासन से मिला लैपटॉप भी नहीं है। हमने लैपटॉप व एसी को कार्यालय में उपलब्ध कराने के निर्देश डीएमसी को दिए हैं।

डीईओ, बालोद

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