हमर छत्तीसगढ़

डिजिटल सिग्नेचर घोटाले का मास्टरमाइंड हिमांशु मिश्रा – प्रशासनिक अफसर अनुराग त्रिवेदी की भूमिका पर भी सवाल

बालोद,:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में जिले की शिक्षा व्यवस्था पर काले धब्बे की तरह चिपक गया है यह डिजिटल सिग्नेचर घोटाला। सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने बताया कि मास्टरमाइंड हिमांशु मिश्रा और उसके साथी विकासखंड समन्वयकों ने रायपुर की संदिग्ध डिजिटल सिग्नेचर कंपनी के साथ मिलकर करोड़ों की ठगी का खेल रचा। हैरानी की बात यह है कि जिला मिशन समन्वयक अनुराग त्रिवेदी ने भी इसे राज्य शासन का आदेश बताकर घोटाले को वैध ठहराने की कोशिश की, जबकि शासन से ऐसा कोई आदेश जारी ही नहीं हुआ था।शिकायतों में साफ कहा गया है कि शिक्षकों और शाला प्रमुखों पर दबाव डालकर प्रति शाला ₹3000 की जबरन वसूली की गई। कुल 1,580 शालाओं से करीब ₹47 लाख की डकैती हुई। प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूलों को डिजिटल सिग्नेचर की कोई आवश्यकता ही नहीं थी, फिर भी शिक्षकों को शिविर में बुलाकर पैसा वसूला गया। शिक्षकों को थमाए गए पेनड्राइव अब बेकार कबाड़ साबित हो रहे हैं, क्योंकि चार साल में इनका एक बार भी उपयोग नहीं हुआ।छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के संभागीय अध्यक्ष भुवन ने जब उच्च कार्यालयों से जानकारी जुटाई तो यह खुलासा हुआ कि न शासन ने आदेश जारी किया और न ही किसी कंपनी को अधिकृत किया।

यानी पूरा खेल हिमांशु मिश्रा की साजिश और जिला प्रशासन की मौन सहमति से हुआ।इस घोटाले का सबसे बड़ा सबूत वह फर्जी पावती है जिसमें न स्कूल का नाम है, न तारीख। इसे देखकर साफ पता चलता है कि यह मामला धारा 420 (धोखाधड़ी), 409 (लोकसेवक द्वारा विश्वासघात), 467/468 (जालसाजी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध है।

फिर भी जिला प्रशासन चुप क्यों है?अनुराग त्रिवेदी का बयान कि “राज्य शासन के निर्देशानुसार यह काम हुआ” स्वयं में संदेहास्पद है। अगर शासन ने कोई आदेश जारी ही नहीं किया, तो फिर त्रिवेदी किसके दबाव में यह बयान दे रहे हैं? क्या यह चुप्पी और ढाल बनना हिमांशु मिश्रा की करतूतों को बचाने की साजिश नहीं है?बालोद प्रशासन की भूमिका अब जनता के सामने उजागर है।

सवाल यह है कि – क्या प्रशासन शिक्षा को सुधारने के लिए है या भ्रष्टाचारियों का सहारा बनने के लिए? हिमांशु मिश्रा और अनुराग त्रिवेदी की मिलीभगत ने जिले के नाम को शर्मसार कर दिया है।अब वक्त आ गया है कि इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच हो, और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए। वरना यह साबित हो जाएगा कि बालोद प्रशासन स्वयं भ्रष्टाचार का साझीदार बन चुका है।

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