हमर छत्तीसगढ़

डीपी कोसरे के गुरूर घोटालों की विस्तृत जांच में भ्रष्टाचार उजागर! तबादला के बाद भी है बालोद में पदस्थ।

डीपी कोसरे के गुरूर घोटालों की विस्तृत जांच में भ्रष्टाचार उजागर! तबादला के बाद भी है बालोद में पदस्थ।

डीपी कोसरे के गुरूर घोटालों की विस्तृत जांच में भ्रष्टाचार उजागर! तबादला के बाद भी है बालोद में पदस्थ।

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरूर ब्लॉक में शिक्षा विभाग के घोटालों का मामला कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल के खुलासों ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। डीपी कोसरे जैसे अधिकारियों के कार्यकाल में हुए कथित घोटालों की जांच से साफ हुआ है कि यह केवल एक व्यक्ति की लापरवाही है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) की धारा 7 और 13 के तहत मामले दर्ज हो सकते हैं, क्योंकि यहां लाखों रुपये का सरकारी खजाना लूटा गया। आइए, तथ्यों के आधार पर इसकी गहराई में उतरें।गुरूर ब्लॉक, जो बालोद जिले का एक प्रमुख प्रशासनिक क्षेत्र है, लंबे समय से शिक्षा विभाग में अनियमितताओं के लिए कुख्यात रहा है। फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ और करीब 50 लाख रुपये का अनियमित व्यय हुआ। शिक्षकों के जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) खातों से राशि गायब कर दी गई।

स्कूल निर्माण और मरम्मत के लिए सर्व शिक्षा अभियान से आए फंड का 30-40% कमीशनखोरी में खर्च हुआ। नतीजतन, आज भी कई ग्रामीण स्कूलों में पीने का पानी, शौचालय और लाइब्रेरी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं।यह संविधान के अनुच्छेद 21 (शिक्षा का अधिकार) का खुला उल्लंघन है। अज्ञात सूत्रों से पता चला है कि डीपी कोसरे जब बीईओ थे गुरूर के तब अपने कार्यकाल में 50 हजार से एक लाख रुपये लेकर ट्रांसफर करते थे 20 से अधिक अपात्र उम्मीदवारों को अवैध रूप से नियुक्त किया गया था।उनकी करतूतें काले धब्बे की तरह शिक्षा विभाग को कलंकित करती आ रही हैं। तबादले और पदस्थापना को पैसे का बाजार बना दिया।योजनाओं के बजट की बंदरबांट हुई और फर्जी निरीक्षण रिपोर्टों से सच पर परदा डाला गया। अब स्थानांतरण आदेशों की अवहेलना कर उच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का उल्लंघन से विभाग में अविश्वास गहराया है।डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी, बालोद)कोसरे को समय पर हटाने में टालमटोल कर रहे हैं वह मिलीभगत और भ्रष्टाचार का संकेत है।

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