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बेटी की नौकरी के लिए डीपी कोसरे और डीईओ ने नियमों का उड़ाया था धज्जियां

बेटी की नौकरी के लिए डीपी कोसरे और डीईओ ने नियमों का उड़ाया था धज्जियां

बेटी की नौकरी के लिए डीपी कोसरे और डीईओ ने नियमों का उड़ाया था धज्जियां

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद शिक्षा विभाग का हाल अब किसी गलीज सौदेबाज मंडी से कम नहीं रहा। सूत्र बताते हैं कि डीपी कोसरे और जिला शिक्षा अधिकारी  की जोड़ी ने मिलकर पूरे विभाग को भ्रष्टाचार की दलदल में धकेल दिया है। डीपी कोसरे का तबादला भले ही धमतरी कर दिया गया हो, लेकिन उनका प्रभाव आज भी बालोद में उसी तरह बना हुआ है जैसे कोई छाया — जो हर आदेश, हर निर्णय और हर फाइल पर हावी है। खबरें सामने आने और भारी जनदबाव के बाद प्रशासन ने बड़ी मुश्किल से उन्हें रिलीव किया, लेकिन असलियत यह है कि उनका नेटवर्क अब भी बालोद में पूरी तरह सक्रिय है।कोसरे का चेहरा अब भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुका है। बेटी को नौकरी दिलाने के लिए इस अधिकारी ने अपनी ईमानदारी, मर्यादा और सरकारी नियम — सबको नीलाम कर दिया। शिक्षक संहिता, जिसे आदर्श माना जाना चाहिए, अब इनके लिए मज़ाक बन चुकी है। ये दोनों अधिकारी (कोसरे और मधुलिका तिवारी) नियमों को ऐसे तोड़ते हैं जैसे किसी खेल का हिस्सा हों।

आत्मानंद भर्ती घोटाले में पैसे लेकर चयन करवाना अब किसी रहस्य की बात नहीं रही। जब घोटाले की खबरें उजागर हुईं, तब विभाग ने दिखावे के लिए सामाजिक विज्ञान भर्ती को निरस्त कर दिया, मगर असली खेल अंदर ही अंदर जारी रहा। वही पुरानी सूची, वही नाम और वही रिश्वती सौदेबाजी।डीईओ मधुलिका तिवारी की भूमिका भी उतनी ही निंदनीय है। वह न केवल कोसरे के कारनामों पर मौन रहीं, बल्कि परदे के पीछे से उन्हें संरक्षण देती रहीं। विभाग में अब फाइलें योग्यता नहीं, बल्कि रुपये के वजन से आगे बढ़ती हैं। कई अभ्यर्थियों ने नाम न उजागर करने की शर्त पर कहा है कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे खुलकर बयान देंगे और एफआईआर भी दर्ज कराएंगे।वर्तमान नोडल अधिकारी लेख राम भी इस पूरी साजिश के तीसरे किरदार हैं। विभाग के भीतर हर मंजूरी की कीमत तय होती है। तीनों की इस भ्रष्ट तिकड़ी ने बालोद की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ तोड़ दी है।अब जनता पूछ रही है — क्या बालोद का शिक्षा विभाग अधिकारियों की निजी स्वार्थ का अड्डा बन गया है? डीपी कोसरे, मधुलिका तिवारी और लेख राम की गंदी सांठगांठ ने न केवल प्रशासन की साख मिटाई है बल्कि बच्चों के भविष्य को भी दांव पर लगा दिया है। अगर शासन ने अब भी कार्रवाई नहीं की, तो बालोद शिक्षा विभाग हमेशा के लिए भ्रष्टाचार के सबसे बड़े चारागाह के रूप में जाना जाएगा।

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