प्रशासन की लोहे का मुहर कोडेवा के शिक्षक मेन सिंह को सबक, हुआ उसके घमंड का अंत”

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में प्राथमिक पाठशाला कोडेवा के मासूम बच्चों की पुकार ने आखिरकार उस कठोर निर्दय भ्रष्टाचारी शिक्षक मेन सिंह साहू को हिला दिया, जो शिक्षण जैसी पवित्र जिम्मेदारी को अपनी निजी जागीर समझकर शासकीय पैसों का दुरुपयोग करते हुए भ्रष्टाचारी कर निजी लाभ के लिए चला कर कमा रहा था ।ग्राम पंचायत, अभिभावकों और ग्रामीणों द्वारा उठाए गए गंभीर आरोप—बच्चों से जबरन मिट्टी उठवाना, शौचालय सफाई कराना, समय पर स्कूल न जाना और विद्यालय को निजी अस्तित्व की बंधक संपत्ति बना देना—अब प्रशासन के लिए सहनशीलता की सीमा पार कर चुके थे।विकासखंड शिक्षा अधिकारी गुण्डरदेही द्वारा की गई जांच में जो तथ्य सामने आए, वह किसी शिक्षक के आचरण का धब्बा नहीं—बल्कि शिक्षक की वर्दी को बदनाम करने वाली विकृत मानसिकता का चेहरा था।इसीलिए जिला कार्यालय ने बिना एक पल गंवाए 10/11/2025 को आदेश जारी कर दोषी शिक्षक मेन सिंह साहू को गलत आचरण के कारण तत्काल प्रभाव में कोडेवा से हटाया और अर्जुनी में कार्य करने को बाध्य किया।यह कार्रवाई सिर्फ पदस्थापना नहीं—यह चेतावनी है, यह दंड है, यह नैतिकता का फैसला है।शिक्षक का पद पवित्र होता है, लेकिन जब कोई व्यक्ति इस कुर्सी पर बैठकर बच्चों को श्रम का औज़ार बना दे, स्कूल को आय का साधन कर सरकारी पैसे से अपनी जेब भरे तो उसकी हर सुविधा, हर विशेषाधिकार और हर घमंड का विसर्जन करना प्रशासन का धर्म बन जाता है।आज का आदेश यह कहता है—“यदि कोई शिक्षक अपने पद का दुरुपयोग करेगा, तो उसका हर कदम कानून और समाज के कठघरे में नंगा होगा।”कोडेवा के बच्चों ने यह साबित कर दिया कि बच्चे छोटे हो सकते हैं,लेकिन उन पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ उठी आवाज़ सबसे बड़ी होती है।प्रशासन की यह सख्त कार्यवाही पूरे जिले को एक स्पष्ट संदेश देती है—शिक्षा का मंदिर यदि अत्याचार की भट्टी बनेगा,तो घमंड की दीवारें ढहाना ही शासन का पहला कर्तव्य होगा।यह घटना याद रहे—शिक्षक का पद सम्मान देता है,पर कर्तव्य से गद्दारी करने वालों का सम्मान उसी दिन खत्म हो जाता है। जैसे मेन सिंह साहू जो पैसे के मद में चूर अहंकारी दुर्व्यवहार से भरा शिक्षक कोड़ेवा का हुआ



