खनिज विभाग में बड़ा फेरबदल — लगातार बढ़ती शिकायतों के बाद बालोद खनिज अधिकारी हटाए गए, जिला प्रशासन में हड़कंप

बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के खनिज विभाग में चल रहे लंबे समय से विवाद, शिकायतों और अनियमितताओं के आरोपों के बीच आखिरकार बड़ी कार्रवाई सामने आई है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, बालोद जिले के खनिज अधिकारी को उनके पद से हटा दिया गया है, जबकि कुछ दिन पहले ही उनके विरुद्ध गंभीर शिकायतें उच्च स्तर पर दर्ज कराई गई थीं। इस निर्णय ने न केवल विभाग के भीतर बल्कि पूरे जिले के प्रशासनिक हलकों में व्यापक चर्चा छेड़ दी है।स्थानीय सूत्र बताते हैं कि बीते कुछ महीनों से खनिज विभाग में अवैध उत्खनन, अनुमति प्रक्रियाओं में अनियमितता, खदानों के निरीक्षण में लापरवाही और राजस्व नुकसान जैसे गंभीर आरोप लगातार उठते रहे। कई सामाजिक संगठनों, पत्रकारों तथा क्षेत्रीय नागरिकों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। कहा जा रहा है कि इन्हीं लगातार बढ़ती शिकायतों ने शासन के कान खड़े कर दिए, जिसके बाद जांच प्रारंभ हुई।गत सप्ताह शिकायतों का एक विस्तृत प्रतिवेदन राज्य स्तर पर जमा किया गया था, जिसमें संबंधित खनिज अधिकारी पर अपने पद के दुरुपयोग, ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने तथा नियमानुसार कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद, विभागीय समीक्षा होते ही खुद राज्य खनिज विभाग ने तत्काल प्रभाव से अधिकारी को जिला से हटाने का आदेश जारी कर दिया।जिले के खनिज क्षेत्र में यह फेरबदल ऐसी स्थिति में हुआ है जब बालोद जिले में खनिज संसाधनों की मांग लगातार बढ़ रही है। निर्माण कार्यों के चलते बालू, गिट्टी और मुरुम की खदानों पर दबाव बढ़ा है, ऐसे में विभाग की निष्पक्ष कार्यप्रणाली बेहद जरूरी मानी जाती है। स्थानीय जनता का मानना है कि यदि शिकायतों पर कार्रवाई न की जाती, तो अवैध उत्खनन और राजस्व हानि का दायरा और भी बढ़ सकता था।कई नागरिकों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम जिले में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाएगा। वहीं, कुछ अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई आने वाले समय में अन्य अनियमितताओं पर भी सख्ती की दिशा तय कर सकती है। अधिकारी हटाने के बाद नए पदस्थापन को लेकर भी चर्चाएँ जोरों पर हैं, हालांकि शासन की ओर से अभी उनको रायपुर में पदस्थापन हुई है।इधर, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि केवल अधिकारी को हटाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पिछले कार्यकाल की संपूर्ण जांच की जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जिले को कितना नुकसान पहुंचा और किन-किन प्रकरणों में लापरवाही हुई।फिलहाल, खनिज अधिकारी को हटाए जाने के बाद विभाग में अफसरों की हलचल तेज हो गई है और जिला प्रशासन भी मामले पर कड़ी नजर बनाए हुए है। अब देखना यह होगा कि क्या आगे विभागीय जांच नए खुलासे करती है या कार्रवाई यहीं तक सीमित रहती है।बालोद जिले के खनिज विभाग में यह बदलाव आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।



