जंबूरी का काला साम्राज्य भ्रष्टाचार की आग में जलता कानून, मोहन निषाद का प्रचंड युद्धघोष युवा सपनों पर प्रशासन का जहर

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला निवासी सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि आज मैं मोहन निषाद, इस भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ खड़ा होकर, अपनी आवाज को कलम की धार बना रहा हूं। मालीघोरी की अंतरराष्ट्रीय रोवर-रेजर जंबूरी – क्या नाम! क्या विचार! युवाओं को साहस, एकता और चरित्र निर्माण सिखाने का वैश्विक मंच। लेकिन बालोद जिला प्रशासन ने इसे क्या बना दिया? एक सुनियोजित लूट का अड्डा, जहां कानून की धज्जियां उड़ाते हुए सिक्को की खनक पर नाच हो रहा है। यह आयोजन नहीं, सरकारी खजाने पर डकैती है, और मैं इसे बेनकाब करने आया हूं – करारे शब्दों में, तीखे प्रहारों से! सबसे पहले, उस जेम पोर्टल के टेंडर को देखिए। समय-सीमा 20 दिसंबर शाम 5:30 बजे। लेकिन उससे पहले ही मशीनें गरज रही थीं, मजदूर पसीना बहा रहे थे, सामग्री उतर रही थी। यह क्या है? पूर्वनिर्धारित ठेका! निविदा, समिति, नियम – सब जनता की आंखों में धूल झोंकने का फर्जी खेल। सामान्य वित्तीय नियम (GFR), छत्तीसगढ़ वित्तीय नियम, जेम पोर्टल की अनिवार्य शर्तें – सबकी हत्या कर दी गई। यदि कानून जिंदा है, तो यह आईपीसी की धारा 420 से धोखाधड़ी, 409 से लोकसेवक का विश्वासघात, और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 व 13 से सीधा अपराध है। अधिकारियों, तुम्हारी यह साजिश नाकाम होगी! मैं कहता हूं, यह सरकारी धन की संगठित लूट है, जहां युवा सपनों को बेचा जा रहा है।अब बात नोडल अधिकारी हिमांशु मिश्रा की। “मुझे जानकारी नहीं” – क्या मजाक है? नोडल होकर अनभिज्ञ? जब मौके पर खुदाई हो रही थी, ट्रक आ-जा रहे थे, तब तुम्हारी आंखें कहां थीं? पट्टी बंधी थी या जानबूझकर अंधे बने थे? यदि जानकारी नहीं थी, तो यह तुम्हारी घोर अक्षमता है, जो पद से हटाने लायक है। और यदि जानकारी थी, तो मिलीभगत! अपराध की मौन भागीदारी! हिमांशु मिश्रा, तुम्हारी यह चुप्पी युवाओं के भविष्य पर वार है। मैं तुम्हें चुनौती देता हूं – जवाब दो, या इस्तीफा दो! तुम जैसे अधिकारी प्रशासन को कलंकित कर रहे हो, जहां रसूख और दलाली राज करती है।जिला स्तरीय समिति? हाह! मात्र कागजी घोड़े। प्रतिस्पर्धात्मक टेंडर की बातें सिर्फ अन्य ठेकेदारों को फंसाने का जाल। असली खेल पर्दे के पीछे तय हो चुका था। यह नैतिक दिवालियापन की चरम सीमा है। प्रशासन, शिक्षा विभाग – तुम सब मिले हुए हो। युवाओं के लिए आयोजन की आड़ में लाखों-करोड़ों की बंदरबांट।
सकारात्मक पक्ष?
हां, जंबूरी का मूल उद्देश्य प्रेरणादायक है – युवा पीढ़ी को सशक्त बनाना, साहसिक गतिविधियों से चरित्र गढ़ना। लेकिन तुम्हारी भ्रष्टाचार की आग ने इसे राख कर दिया। यदि पारदर्शिता आती, तो यह वैश्विक मिसाल बनता, युवाओं के लिए उत्साह का स्रोत।
लेकिन नकारात्मक वास्तविकता?
यह प्रशासनिक पतन की पाठशाला है, जहां कानून पैरों तले रौंदा जा रहा है।मैं मोहन निषाद, सामाजिक कार्यकर्ता, चेतावनी देता हूं – यदि इस मामले को दबाया गया, तो यह संदेश जाएगा कि बालोद में कानून नहीं, भ्रष्ट तंत्र चलता है। उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच हो, दोषी अधिकारियों का तत्काल निलंबन, और आपराधिक प्रकरण दर्ज। हिमांशु मिश्रा से शुरू कर पूरे प्रशासन को जवाबदेह बनाओ! यह लड़ाई युवा भविष्य की है। जोश से कहता हूं, भ्रष्टाचार की जड़ें उखाड़ फेंको। सकारात्मक बदलाव संभव है – यदि हम एकजुट हों, तो जंबूरी सच्चे उत्साह की मिसाल बनेगी, जहां ईमानदारी की जीत हो। लेकिन अभी, यह लूट का खेल है। अधिकारियों, तुम्हारी साजिशें उजागर हो चुकी हैं। जनता जाग चुकी है!यह केवल अनियमितता नहीं, सुनियोजित अपराध है। टेंडर से पहले काम शुरू – यह वित्तीय नियमों का घोर अपमान। अन्य ठेकेदारों को झूठी उम्मीद में उलझाया, जबकि ठेका चहेतों को सौंपा गया। शिक्षा विभाग, तुम युवाओं के शिक्षक हो या लुटेरे? जंबूरी का नाम लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच की चमक, लेकिन अंदर से सड़ांध। मैं तीखे शब्दों में कहता हूं – यह सरकारी खजाने पर डाका है, जहां हर ईंट में भ्रष्टाचार की बदबू है। नोडल अधिकारी की लापरवाही अस्वीकार्य; यदि अनजान, तो अयोग्य, यदि जानकार, तो अपराधी। दोनों ही मामलों में सजा अनिवार्य! साथियों, सकारात्मक दृष्टि रखें – जंबूरी युवाओं को वैश्विक स्तर पर एकजुट करने का अवसर है, जो साहस और सहयोग सिखाता है। लेकिन प्रशासन की नकारात्मक साजिश ने इसे दागदार कर दिया। हम मांग करते हैं – जांच दल गठित हो, सबूत जुटाए जाएं, दोषियों पर मुकदमा चले। यह जोशीला संघर्ष है, जहां हम भ्रष्ट तंत्र को नेस्तनाबूद करेंगे। मोहन निषाद की यह पुकार है – उठो, लड़ो, जीतो! कानून की रक्षा करो, युवा सपनों को बचाओ। यदि नहीं, तो यह आयोजन इतिहास में भ्रष्टाचार की काली मिसाल बनेगा। अधिकारियों, तुम्हारी शामत आई है!अंत में, मैं दो टूक कहता हूं – यह जंबूरी नहीं, भ्रष्टाचार की जंबूरी है। नियमों की हत्या, कानून की शवयात्रा। लेकिन हम हार नहीं मानेंगे। सकारात्मक लक्ष्य के साथ नकारात्मक विनाश को चुनौती देंगे। उच्च जांच, निलंबन, मुकदमा – यही मांग है। जोश से आगे बढ़ो, साथियों! भ्रष्टाचार को कुचलो, नई सुबह लाओ। यह मेरी करारी चुनौती है – प्रशासन, जवाब दो



