संघर्ष की मशाल प्रज्वलित करने वाला डॉ. किशोर साहू की ताजपोशी से गुरुर कांग्रेस में नई आक्रामक ऊर्जा

बालोद/गुरुर:- अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संगठन सृजन अभियान के तहत गुरुर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी को वह नेतृत्व मिला है, जिसकी ज़रूरत जमीनी संघर्ष, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए लंबे समय से महसूस की जा रही थी। डॉ. किशोर साहू को ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के साथ ही संगठन में नई धार, नई दिशा और नया संकल्प स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। 21 जनवरी 2026 को सिन्हा सदन, गुरुर में आयोजित अभिनंदन समारोह केवल औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह जनचेतना, जवाबदेही और बदलाव का ऐलान बनकर उभरा।यह नियुक्ति उस दौर में हुई है, जब आम आदमी महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की बदहाली, युवाओं के भविष्य और सामाजिक असमानता से जूझ रहा है। ऐसे समय में कांग्रेस का संगठनात्मक पुनर्गठन केवल पद वितरण नहीं, बल्कि जनता के सवालों को सड़क से सदन तक उठाने की रणनीति है। डॉ. किशोर साहू की छवि एक संवेदनशील, शिक्षित और संघर्षशील नेता की रही है, जो संवाद से समाधान और आंदोलन से अधिकार की राजनीति में विश्वास रखते हैं। यही कारण है कि कार्यकर्ताओं के बीच इस नियुक्ति को उम्मीद की किरण के रूप में देखा जा रहा है।अभिनंदन समारोह में पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष तामेश्वर साहू का सम्मान संगठनात्मक परंपरा और राजनीतिक मर्यादा का उदाहरण रहा। उनके कार्यकाल के दौरान संगठन को एकजुट रखने, कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और प्रतिबद्धता दिखाने के लिए उन्हें साधुवाद दिया गया। यह संदेश भी स्पष्ट गया कि कांग्रेस में कुर्सी नहीं, कर्म का सम्मान होता है।कार्यक्रम में जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी ने दो टूक शब्दों में कहा कि संगठन को अब निष्क्रियता नहीं, निर्णायक संघर्ष की ज़रूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता की समस्याओं पर चुप्पी साधना सबसे बड़ा अपराध है। विधायक श्रीमती संगीता सिन्हा ने सामाजिक सरोकारों को केंद्र में रखते हुए कहा कि महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और युवाओं की आवाज़ को ताकत देने का समय आ गया है। पूर्व विधायक भैयाराम सिन्हा ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सम्मान देने और सत्ता के अहंकार के खिलाफ लोकतांत्रिक लड़ाई तेज करने का आह्वान किया।डॉ. किशोर साहू ने अपने संबोधन में किसी भी प्रकार की लाग-लपेट से दूर रहते हुए साफ कहा कि संगठन का मतलब केवल चुनाव नहीं, बल्कि हर दिन जनता के साथ खड़ा रहना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को गांव, गली और खेत तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, किसान हित, आदिवासी अधिकार और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दों पर समझौता नहीं किया जाएगा। सत्ता के दमन, प्रशासनिक उदासीनता और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी—यह उनका स्पष्ट संदेश था।यह समारोह सत्ता के गलियारों को ललकारने वाला संकेत भी था। जब शासन व्यवस्था सवालों से भागती है, तब मजबूत संगठन ही लोकतंत्र की ढाल बनता है। गुरुर ब्लॉक में यह संदेश गूंजा कि कांग्रेस अब प्रतीक्षा नहीं करेगी, बल्कि पहल करेगी। जनहित के मुद्दों पर चुप्पी तोड़ना, भ्रष्टाचार पर प्रहार करना और संविधान की आत्मा की रक्षा करना ही संगठन का ध्येय होगा।कार्यकर्ताओं में जोश, अनुशासन और आत्मविश्वास साफ झलका। यह केवल तालियों का शोर नहीं, बल्कि संघर्ष की तैयारी थी। कांग्रेस परिवार से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होने की अपील भी इसी भावना का विस्तार थी कि यह लड़ाई अकेले नेताओं की नहीं, बल्कि हर उस नागरिक की है जो न्याय, समानता और सम्मान चाहता है।अंततः, डॉ. किशोर साहू का ब्लॉक अध्यक्ष बनना एक नाम भर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का संकल्प है। गुरुर की राजनीति में यह बदलाव का बिगुल है—जहां मुद्दे हावी होंगे, जहां जनसरोकार सर्वोपरि होंगे और जहां संगठन सत्ता के सामने झुकेगा नहीं, बल्कि सच के साथ डटकर खड़ा रहेगा। यह शुरुआत है, और यह शुरुआत निर्णायक है।



