हमर छत्तीसगढ़

गणतंत्र दिवस के अवसर पर पूर्व सैनिक देवेंद्र डड़सेना हुए सम्मानित

 

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, जिला बालोद द्वारा उत्कृष्ट और सराहनीय कार्यों के लिए पूर्व सैनिक देवेन्द्र डड़सेना को सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के करकमलों से प्रदान किया गया। पूरा समारोह  देशभक्ति, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से ओत-प्रोत रहा, जहां पूर्व सैनिकों के योगदान को सम्मान के साथ स्मरण किया गया।पूर्व सैनिक देवेंद्र कुमार डड़सेना विभिन्न पदों पर अपने दायित्वों का निर्वहन अत्यंत बखूबी और निष्ठा के साथ कर रहे हैं। वर्तमान में वे प्रदेश संयोजक शिक्षाप्रकोष्ठ, छत्तीसगढ़ कलार समाज, सहसचिव, जन कल्याण समिति डडसेना सिन्हा समाज दुर्ग, तथा प्रदेश मीडिया प्रभारी, अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद छत्तीसगढ़ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सुशोभित हैं। इन सभी दायित्वों का निर्वहन करते हुए वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभा रहे हैं।अपने सामाजिक और राष्ट्रहितकारी कार्यों के माध्यम से पूर्व सैनिक देवेन्द्र डड़सेना ने विशेष पहचान बनाई है। उनके द्वारा विभिन्न स्थानों पर संचालित निःशुल्क सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है। इन प्रशिक्षणों से न केवल युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और देशभक्ति की भावना विकसित हुई है, बल्कि कई युवाओं को सैन्य सेवाओं में सफलता प्राप्त करने में भी मार्गदर्शन मिला है। यह कार्य युवाओं के भविष्य को दिशा देने के साथ-साथ देश की सेवा के लिए समर्पित नागरिकों की एक सशक्त और सक्षम पीढ़ी तैयार करने में सहायक सिद्ध हो रहा है।पूर्व सैनिक देवेन्द्र डड़सेना का जीवन इस बात का प्रेरणादायक उदाहरण है कि सेना में सेवा पूर्ण करने के बाद भी समाज और राष्ट्र के लिए योगदान की राह कभी समाप्त नहीं होती। उनके निःशुल्क सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को सशक्त बनाने, उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करने और देश सेवा के लिए प्रेरित करने का प्रभावी माध्यम हैं। उनका निरंतर समर्पण, कर्मठता और निस्वार्थ सेवा भाव उन्हें एक सच्चे राष्ट्रभक्त और समाज सुधारक के रूप में स्थापित करता है।
उल्लेखनीय है कि पूर्व सैनिक देवेन्द्र डड़सेना, भोज राम डड़सेना के सुपुत्र हैं, जो कि छत्तीसगढ़ कलार समाज के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सामाजिक सेवा, संगठनात्मक क्षमता और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता की यह परंपरा उनके जीवन और कार्यों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर मिला यह सम्मान न केवल उनके अब तक के कार्यों की स्वीकृति है, बल्कि भविष्य में और अधिक उत्साह, ऊर्जा तथा जोश के साथ समाज और राष्ट्र के लिए कार्य करते रहने की प्रेरणा भी है।

Related Articles

Back to top button