सामाजिक एकता को नई दिशा सुचित्रा साहू बनीं जिला महिला संयोजिका

प्रधान संपादक मीनू साहू
रिपोर्टर:- उत्तम साहू
बालोद/पलारी:-छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में साहू समाज ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए श्रीमती सुचित्रा साहू को जिला महिला संयोजिका की जिम्मेदारी सौंपी है। यह नियुक्ति केवल पदभार नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास और नेतृत्व क्षमता की सार्वजनिक स्वीकृति भी मानी जा रही है।सामाजिक चेतना, संगठनात्मक प्रतिबद्धता और सेवा भाव से परिपूर्ण नेतृत्व ही किसी समाज को आगे बढ़ाने की असली ताकत बनता है। इसी सोच के साथ जिला साहू संघ के अध्यक्ष महेंद्र कुमार साहू एवं समस्त पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया। ग्राम खलारी, गुंडरदेही निवासी सुचित्रा साहू को उनकी निरंतर सामाजिक सक्रियता, संगठन के प्रति निष्ठा, सेवा की भावना तथा महिलाओं को जोड़ने की क्षमता के कारण इस दायित्व के लिए चुना गया। समाज को संगठित करने, नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने और महिला भागीदारी बढ़ाने की दिशा में उनकी भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।जिला स्तरीय शपथ ग्रहण समारोह भी बेहद गरिमामय रहा। इस अवसर पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव, पूर्व गृहमंत्री ताम्रजध्वज साहू सहित समाज के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। उनके सान्निध्य में सुचित्रा साहू ने पद की शपथ लेकर समाजहित में सक्रिय योगदान देने का संकल्प व्यक्त किया।सुचित्रा साहू का सामाजिक अनुभव भी उल्लेखनीय रहा है। वे पूर्व में साहू समाज युवा प्रकोष्ठ दुर्ग संभाग की उपाध्यक्ष के रूप में संगठनात्मक कार्य कर चुकी हैं तथा जनपद पंचायत गुंडरदेही की अध्यक्ष रहते हुए ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और जनभागीदारी को बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा चुकी हैं। यही अनुभव अब उन्हें जिला स्तर पर अधिक प्रभावी नेतृत्व देने में सहायक होगा।उनकी नियुक्ति से समाज में नई ऊर्जा का संचार होने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषकर महिलाओं की भागीदारी, शिक्षा के प्रति जागरूकता, सामाजिक सहयोग, परंपरागत मूल्यों के संरक्षण तथा युवा नेतृत्व के निर्माण जैसे विषयों पर ठोस पहल की संभावना बढ़ी है। समाज के वरिष्ठजनों का मानना है कि उनका नेतृत्व संवाद, समन्वय और संगठनात्मक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।सुचित्रा साहू ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह दायित्व उनके लिए सम्मान से अधिक जिम्मेदारी है। उन्होंने समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने, महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में भागीदार बनाने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।निस्संदेह, यह नियुक्ति केवल एक पदस्थापन नहीं, बल्कि समाज के भविष्य को संगठित, सशक्त और जागरूक बनाने की दिशा में उठाया गया सार्थक कदम है।



