ग्राम पंचायत अरकार में नशे का साम्राज्य बोर्ड कड़ा, ज़मीन पर कानून लाचार

रिपोर्टर:- उत्तम साहू
बालोद/पलारी:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के विकासखंड गुरूर अंतर्गत आने वाला अरकार इन दिनों कानून की खुली धज्जियाँ उड़ाने का जिंदा उदाहरण बन चुका है। पंचायत ने चौक-चौराहों पर नशापान करने वालों पर दो हजार रुपये जुर्माने का बोर्ड तो टांग दिया, लेकिन हकीकत यह है कि वही चौक आज नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है और नियम सिर्फ दीवार पर टंगे कागज़ तक सीमित होकर रह गए हैं।गांव का पुराना बाजार चौक, जहां से स्कूल जाने वाले बच्चे, महिलाएं और आसपास के ग्रामीण रोज गुजरते हैं, वहीं दिनदहाड़े गांजा, हुक्का और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन धड़ल्ले से जारी है। हालात इतने बिगड़े हुए हैं कि विरोध करने वालों को ही धमकाया जाता है। खुलेआम बैठे नशेड़ियों के हौसले इतने बुलंद हैं मानो उन्हें किसी कानून, प्रशासन या पंचायत का भय ही नहीं।
सबसे गंभीर बात यह है कि पंचायत द्वारा लगाया गया चेतावनी बोर्ड मज़ाक बन चुका है। दंड की घोषणा है, पर कार्रवाई शून्य। सवाल उठता है कि क्या यह बोर्ड सिर्फ दिखावे के लिए लगाया गया था? अगर नियम लागू नहीं होना था तो जनता को भ्रमित करने का यह ढोंग क्यों?ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में अवैध गांजा बिक्री लंबे समय से जारी है और यह कारोबार किसी गुप्त कोने में नहीं, बल्कि खुलेआम घरों से संचालित हो रहा है। चौबीसों घंटे चल रही इस बिक्री ने पूरे इलाके को नशे के दलदल में धकेल दिया है। जब जड़ ही जहरीली हो, तो शाखाओं में जहर फैलना तय है। जहां अवैध बिक्री खुलेआम होगी, वहां सेवन करने वालों की भीड़ लगना स्वाभाविक है।स्थिति यह दर्शाती है कि पंचायत की सख्ती कागज़ी है और स्थानीय स्तर पर मिलीभगत की बू आ रही है। अगर पंचायत सच में नशामुक्ति चाहती है तो उसे दिखावटी बोर्ड नहीं, ठोस कार्रवाई करनी होगी। अवैध बिक्री पर तत्काल रोक, पुलिस की नियमित गश्त, दोषियों पर सार्वजनिक कार्रवाई और पंचायत की जवाबदेही तय किए बिना हालात सुधरने वाले नहीं।



