अरकार में गांजे का खेल और आबकारी विभाग मौन! आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा नशे का कारोबार?

रिपोर्टर :- उत्तम साहु
बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के गुरुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत अरकार में इन दिनों एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आ रहा है। गांव के बीचों-बीच कथित रूप से गांजा बेचे जाने की चर्चाएं तेज हो चुकी हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार आबकारी विभाग अब तक इस पूरे मामले में चुप्पी साधे बैठा है। ग्रामीणों के बीच यह सवाल लगातार गूंज रहा है कि आखिर खुलेआम नशे का कारोबार चलने की बात सामने आने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।स्थानीय लोगों का आरोप है कि गांव में दिलीप कोसरे नाम के व्यक्ति द्वारा गांजा बेचे जाने की गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं। गांव में कुछ खास स्थानों पर संदिग्ध लोगों का आना-जाना बढ़ गया है और कई बार युवाओं को वहां नशे की हालत में देखा गया है। यह स्थिति न केवल गांव की सामाजिक व्यवस्था को कमजोर कर रही है बल्कि युवाओं के भविष्य को भी अंधकार की ओर धकेल रही है।सबसे बड़ा सवाल आबकारी विभाग की भूमिका को लेकर उठ रहा है। जब गांव के लोग लगातार इस तरह की गतिविधियों की चर्चा कर रहे हैं और तस्वीरें तक सामने आने लगी हैं, तब विभाग की निष्क्रियता कई तरह की शंकाओं को जन्म दे रही है। क्या आबकारी विभाग को इस पूरे मामले की जानकारी नहीं है, या फिर जानकारी होने के बावजूद आंखें मूंद ली गई हैं?ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और आबकारी विभाग समय रहते सख्ती नहीं दिखाते, तो यह नशे का जाल और तेजी से फैल सकता है। गांव के बुजुर्गों ने भी चिंता जताई है कि नशे की वजह से युवा पीढ़ी धीरे-धीरे गलत रास्ते पर जा सकती है। एक शांत और संस्कारों से भरे गांव में इस तरह का माहौल बनना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण माना जा रहा है।
अब
अब सवाल यह उठता है कि आबकारी विभाग आखिर किस बात का इंतजार कर रहा है। क्या विभाग किसी बड़ी घटना के बाद जागेगा या फिर कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगी? यदि सच में गांजे का अवैध कारोबार चल रहा है, तो जिम्मेदार विभाग की यह चुप्पी कहीं न कहीं उसकी कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी भी व्यक्ति की भूमिका अवैध नशे के कारोबार में पाई जाती है तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही आबकारी विभाग की कार्यशैली की भी जांच होनी चाहिए कि आखिर इतने समय से यह मामला सामने आने के बावजूद ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए।अरकार का यह मामला अब केवल एक गांव की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही का भी बड़ा सवाल बन चुका है। अब देखना यह होगा कि आबकारी विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कब जागता है और क्या वास्तव में नशे के इस कथित कारोबार पर लगाम लगाई जाती है।



