हमर छत्तीसगढ़

अफवाहों का जाल तोड़ें, जागरूकता की मशाल जलाएं:- संपादक मीनू साहु की कलम 

 

रिपोर्ट:- उत्तम साहु 

संपादकीय आलेख :- समाज में अफवाहें हमेशा से सबसे खतरनाक हथियार रही हैं। यह ऐसा अदृश्य जहर है जो कुछ ही पलों में लोगों के मन में डर, भ्रम और अविश्वास भर देता है। आज के डिजिटल दौर में जहां मोबाइल और सोशल मीडिया हर हाथ में है, वहां झूठी खबरें पहले से कहीं ज्यादा तेजी से फैलती हैं। ऐसे समय में जरूरी है कि हम भावनाओं के बजाय विवेक से काम लें और जागरूक नागरिक होने का परिचय दें।हाल के दिनों में घरेलू एलपीजी गैस और पेट्रोल-डीजल को लेकर तरह-तरह की बातें सोशल मीडिया पर फैलती देखी जा रही हैं। कुछ संदेश ऐसे होते हैं जो लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि ईंधन की कमी होने वाली है, इसलिए तुरंत ज्यादा से ज्यादा बुकिंग करवा लें। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की आपूर्ति नियमित रूप से की जा रही है।जब लोग बिना जरूरत के बार-बार गैस बुकिंग करने लगते हैं, तो इससे व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है। जिन परिवारों को सच में तत्काल सिलेंडर की जरूरत होती है, उन्हें भी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। यही कारण है कि प्रशासन और संबंधित विभाग लगातार नागरिकों से अपील कर रहे हैं कि अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से गैस की बुकिंग न करें।एक जिम्मेदार नागरिक की पहचान यही होती है कि वह किसी भी सूचना को आंख बंद कर स्वीकार नहीं करता, बल्कि उसकी सत्यता की जांच करता है। अगर कोई संदेश डर फैलाने वाला हो, तो उसे आगे बढ़ाने के बजाय वहीं रोक देना ही सबसे बड़ा सामाजिक दायित्व है। याद रखिए, एक झूठा संदेश सैकड़ों लोगों को भ्रमित कर सकता है, लेकिन एक जागरूक व्यक्ति उस भ्रम को खत्म भी कर सकता है।आज जरूरत है कि हम अफवाहों की भीड़ में सच की आवाज बनें। अगर आपूर्ति से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी या शिकायत हो, तो अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय सीधे आधिकारिक माध्यमों से संपर्क करें। इसके लिए टोल-फ्री नंबर 1800-233-3663 उपलब्ध है, जहां से सही और प्रमाणिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।दरअसल, समाज की असली ताकत उसकी जागरूकता में होती है। जब नागरिक सच और झूठ में फर्क करना सीख जाते हैं, तब अफवाहें खुद-ब-खुद दम तोड़ देती हैं। इसलिए समय की मांग यही है कि हम डर के वातावरण को खत्म करें और समझदारी की संस्कृति को मजबूत बनाएं।आइए संकल्प लें कि न हम अफवाह फैलाएंगे और न ही उसे बढ़ावा देंगे। सच को अपनाकर, संयम से काम लेकर और जिम्मेदारी निभाकर ही हम एक सशक्त, जागरूक और सुरक्षित समाज का निर्माण कर सकते हैं।

संपादक: मीनू साहु 

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