हमर छत्तीसगढ़

पानी की हर बूंद का मान चिरपोटी की सरपंच पूजा चंद्राकर ने रचा जनभागीदारी से जल प्रबंधन का नया इतिहास

 

संपादक:- मीनू साहु 

दुर्ग:- छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के छोटे से गांव चिरपोटी से निकली एक पहल आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई है। गांव की सरपंच पूजा चंद्राकर ने यह साबित कर दिया कि यदि नेतृत्व में प्रतिबद्धता और दूरदृष्टि हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़े परिवर्तन संभव हैं। जल प्रबंधन और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए उन्हें दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय जल महोत्सव 2026 के मंच पर सम्मानित किया गया।यह सम्मान केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस सामूहिक सोच का प्रतीक है जिसमें गांव की जनता और नेतृत्व ने मिलकर जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया। चिरपोटी में पहले पानी की व्यवस्था चुनौतीपूर्ण थी। कई घरों तक नियमित जल आपूर्ति नहीं पहुंच पाती थी और ग्रामीणों को दूर-दराज के स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन सरपंच पूजा चंद्राकर ने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया।उन्होंने गांव में नल-जल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य प्रारंभ किया। जल जीवन मिशन के अंतर्गत उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए गए। इसके साथ ही गांव के लोगों को यह समझाया गया कि पानी केवल सुविधा नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी है। जलकर व्यवस्था को पारदर्शी तरीके से लागू कर ग्रामीणों को इस योजना का सहभागी बनाया गया, जिससे व्यवस्था आत्मनिर्भर और टिकाऊ बन सकी।चिरपोटी में आज नल से घर-घर पानी पहुंच रहा है। यह परिवर्तन केवल तकनीकी व्यवस्था का परिणाम नहीं बल्कि जागरूकता, अनुशासन और सामूहिक सहयोग का प्रतिफल है। सरपंच पूजा चंद्राकर ने लगातार बैठकें आयोजित कर ग्रामीणों को जल संरक्षण, जिम्मेदार उपयोग और संसाधनों की सुरक्षा के महत्व से अवगत कराया। यही कारण है कि गांव में जल प्रबंधन की व्यवस्था व्यवस्थित और सुचारू रूप से संचालित हो रही है।राष्ट्रीय जल महोत्सव में मिला सम्मान इस बात का प्रमाण है कि जब स्थानीय नेतृत्व समाज की जरूरतों को समझकर ईमानदारी से काम करता है, तो उसका प्रभाव दूर तक दिखाई देता है। चिरपोटी आज उस सोच का उदाहरण बन गया है जहां विकास केवल योजनाओं से नहीं बल्कि जनभागीदारी से आगे बढ़ता है।पूजा चंद्राकर का यह प्रयास यह संदेश देता है कि गांव की तरक्की की असली ताकत गांव के लोगों के भीतर ही होती है। जरूरत होती है तो बस ऐसे नेतृत्व की, जो उस शक्ति को दिशा दे सके। चिरपोटी की यह कहानी अब केवल एक गांव की नहीं रही, बल्कि यह देश के हर उस गांव के लिए प्रेरणा है जो अपने संसाधनों को संभालकर भविष्य को सुरक्षित बनाना चाहता है।

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