मिल का मजदूर बना किसान! शक्कर कारखाने में फर्जी गन्ना सप्लाई का बड़ा खेल उजागर, लाखों की भुगतान राशि पर उठे सवाल

संपादक :- मीनू साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में गुरूर तहसील अंतर्गत ग्राम करकाभाट शक्कर कारखाना का मामले में अब गंभीर जांच और कार्रवाई की मांग उठाने लगा है। अज्ञात सूत्रों से पता चला है कि रमतरा निवासी नरायण साहू पिता रेवा साहू, जो स्थानीय स्तर पर कारखाने में मजदूरी करने वाला व्यक्ति बताया जा रहा है, उसके नाम पर मां दंतेश्वरी शक्कर कारखाना कारकाभाट में भारी मात्रा में गन्ना सप्लाई दर्शाकर लाखों रुपये का भुगतान किया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। दस्तावेजों में दर्ज आंकड़ों के अनुसार अलग-अलग तिथियों में कुल 485.63 क्विंटल गन्ना सप्लाई दिखाया गया है, जिसके एवज में 1 लाख 59 हजार 796 रुपये 57 पैसे का भुगतान दर्शाया गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संबंधित व्यक्ति के पूरे खेत में उस दौरान धान की फसल लगी हुई थी। इतना ही नहीं, उस धान को सोसाइटी में बेचने की पुष्टि भी हमारी टीम द्वारा की गई जांच में सामने आई है। यानी जिस जमीन पर धान बोया गया और फसल बेची गई, उसी किसान के नाम पर गन्ना उत्पादन और सप्लाई दिखा देना सीधे-सीधे फर्जीवाड़े और रिकॉर्ड में हेराफेरी की ओर इशारा करता है।अब सवाल यह उठता है कि आखिर बिना गन्ना बोए 485 क्विंटल से ज्यादा गन्ना कहां से आ गया? क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति को फायदा पहुंचाने के लिए गरीब मजदूर के नाम का इस्तेमाल किया गया? या फिर कारखाने के भीतर बैठा कोई नेटवर्क फर्जी किसानों और फर्जी परिवहन के सहारे भुगतान निकालने में जुटा है?
गांव के लोगों का कहना है कि नरायण साहू छोटा किसान है और बेहद सामान्य आर्थिक स्थिति वाला व्यक्ति है। वहीं के शक्कर कारखाना में मजदूरी कर जीवन यापन करता है। ऐसे में उसके नाम पर इतनी बड़ी मात्रा में गन्ना बिक्री दिखना पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
यह मामला केवल एक किसान का नहीं, बल्कि उन वास्तविक किसानों के अधिकारों से जुड़ा है जो दिन-रात मेहनत कर खेती करते हैं। यदि फर्जी सप्लाई और कागजी उत्पादन के जरिए भुगतान निकाला जा रहा है तो यह सरकारी व्यवस्था, सहकारी तंत्र और किसानों के भरोसे पर सीधा हमला है। अब जरूरत है कि प्रशासन, सहकारिता विभाग और शक्कर कारखाना प्रबंधन इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में गरीबों के नाम पर होने वाले ऐसे खेल पर पूरी तरह लगाम लग सके।



