बालोद के जामड़ी पाटेश्वर धाम में संपन्न हुई देव जातरा, विवादों के बीच प्रशासन की बड़ी परीक्षा

संपादक :- मीनू साहू
बालोद :- छत्तीसगढ़ में बालोद जिला के डौंडीलोहारा विकासखंड में ग्राम तुएगोंदी स्थित जामड़ी पाटेश्वर धाम में आयोजित सर्व आदिवासी समाज की पारंपरिक एवं ऐतिहासिक देव जम्हापाट बाबा संरक्षण करसाड़ यात्रा (देव जातरा) आखिरकार तनावपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ । बीते कई महीनों से इस धार्मिक स्थल को लेकर चल रहे विवाद, वन भूमि पर कथित अतिक्रमण और सामाजिक आंदोलनों के कारण इस बार का आयोजन प्रशासन के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। लेकिन हजारों श्रद्धालुओं की आस्था और प्रशासनिक सतर्कता के बीच देव जातरा बड़े विवाद के बाद संपन्न हो गई।
जामड़ी पाटेश्वर धाम को लेकर सर्व आदिवासी समाज लगातार आवाज उठाता रहा है। समाज का आरोप था कि लगभग 12 एकड़ वन भूमि पर कथित अतिक्रमण और अवैध निर्माण के कारण उनके पारंपरिक देवस्थल की मूल पहचान प्रभावित हुई है। इसी मुद्दे को लेकर समाज ने जिला मुख्यालय तक प्रदर्शन किया और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की थी। मामला बढ़ने पर जिला प्रशासन को स्वयं मैदान में उतरना पड़ा।
प्रशासन ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की निगरानी में भारी पुलिस बल, वन विभाग और अन्य अमले को तैनात किया। जलकेना क्षेत्र में कथित अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के लिए जेसीबी मशीनें लगाई गईं और विवादित क्षेत्रों को लेकर सख्त निगरानी रखी गई। इसके बाद हुई बैठकों में आदिवासी समाज और प्रशासन के बीच सहमति बनी कि देव जातरा का आयोजन पूरी शांति और मर्यादा के साथ कराया जाएगा।
संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व रही। आयोजन स्थल, पहाड़ी मार्ग, प्रवेश द्वार और आसपास के इलाकों में करीब तीन हजार से अधिक पुलिस अधिकारी एवं जवान तैनात रहे। हर गतिविधि पर प्रशासन की पैनी नजर बनी रही, जिसके चलते पूरे आयोजन के दौरान मीडिया कर्मियों के साथ बदसलूकी को छोड़ किसी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई।
हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर प्रशासन के कुछ फैसले सवालों के घेरे में भी रहे। कवरेज के लिए पहुंचे कई पत्रकारों को बड़ेजुंगेरा क्षेत्र से आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई। बताया गया कि देवस्थल से लगभग छह किलोमीटर पहले ही मीडिया कर्मियों को रोक दिया गया, जिससे पत्रकारों में नाराजगी देखने को मिली। पत्रकारों का कहना था कि समाचार संकलन के लिए स्थल तक पहुंचना आवश्यक था, लेकिन सुरक्षा का हवाला देकर उन्हें रोका गया। इस निर्णय ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया की भूमिका को लेकर भी चर्चा छेड़ दी।
फिलहाल सबसे बड़ी बात यह रही कि तमाम विवादों, आरोप-प्रत्यारोपों और तनावपूर्ण माहौल के बावजूद आस्था की जीत हुई, देव जातरा संपन्न हुई और प्रशासन ने राहत की सांस ली।



