हमर छत्तीसगढ़

खबर से मचा हड़कंप! सरकारी जमीन पर कब्जे की साजिश बेनकाब

आनन-फानन में पुरानी तारीख का आवेदन, ग्राम विकास समिति के खेल पर उठे बड़े सवाल

 

संपादक:- मीनू साहू 

बालोद :- छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के गुरुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत ओझागहन में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे के मामले में बड़ा मोड़ सामने आया है। बिसनाथ तालाब के नीचे स्थित शासकीय भूमि पर जेसीबी से झाड़ियां उखाड़कर अवैध कब्जे की तैयारी के खबर सामने आने के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया।

मामला यहीं नहीं रुका। जानकारी के अनुसार, जब आवेदक ओझागहन ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम पड़कीभाट निवासी वार्ड क्रमांक 12 के पंच पूरन साहू पिता खम्हन साहू आवेदन लेकर ग्राम पंचायत पहुंचा तो सरपंच, सचिव और अन्य पंचों ने पूरन साहू को जमकर खरी-खोटी सुनाई। पंचायत प्रतिनिधियों ने कथित रूप से स्पष्ट कहा कि बिना पंचायत की सहमति किसी भी सरकारी भूमि पर निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती।

इसी कारण रनिंग ट्रैक निर्माण के लिए सहमति देने से इनकार कर दिया गया।इसके बाद जिस तेजी से घटनाक्रम बदला, उसने पूरे मामले पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण की कोशिश उजागर होने के बाद अब पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जिस रनिंग ट्रैक निर्माण के नाम पर प्रचारित किया जा रहा है, उसी के पीछे अब सवालों का अंबार खड़ा हो गया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वास्तव में ग्रामहित में रनिंग ट्रैक बनाना उद्देश्य था, तो खबर सामने आने से पहले ग्राम पंचायत में विधिवत सहमति क्यों नहीं ली गई? और जब मामला सार्वजनिक हुआ, तभी अचानक पुराने दिनांक का आवेदन कैसे सामने आ गया?बताया जा रहा है कि सरकारी जमीन पर कब्जे की खबर प्रसारित होते ही पूरन साहू द्वारा ग्राम विकास समिति के लोगों को आनन-फानन में एक आवेदन तैयार कर उसे 18 जून 2026 की पूर्व तिथि का बताने का प्रयास किया।

जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि यह आवेदन वास्तव में खबर चलने के बाद दिया गया, ताकि पूरे मामले को वैध दिखाया जा सके और पहले से उठ रहे सवालों को दबाया जा सके।इसके बावजूद सवाल उठ रहे हैं कि जब पंचायत ने अनुमति ही नहीं दी, तब पुरानी तारीख का आवेदन दिखाकर आखिर किसे भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है? क्या यह सरकारी जमीन पर कब्जे की मंशा को छिपाने का प्रयास था, या फिर खबर के दबाव में पूरा घटनाक्रम बदलने की कोशिश की गई?ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले में ग्राम विकास समिति की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।

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