हमर छत्तीसगढ़

अरकार दारू भट्ठी का काला खेल? 53 पेटी शराब जब्त

कर्मचारियों पर गिरी गाज, असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब?

संपादक:- मीनू साहू 

बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आबकारी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, अरकार दारू भट्ठी से कथित रूप से शराब की अवैध सप्लाई का मामला उजागर होने के बाद भट्ठी से जुड़े कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। बताया जा रहा है कि टिकु निवासी कोसगोदी, सुपरवाइजर देशमुख यशपाल तथा उनके साथ कार्यरत दो सिक्योरिटी गार्ड सहित कुल पांच लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया है।

बताया जा रहा है कि कथित रूप से इन्हीं लोगों द्वारा बोलरों के माध्यम से शराब की सप्लाई की जा रही थी। इसी दौरान धमतरी थाना पुलिस ने संबलपुर क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए 53 पेटी शराब जब्त की। जब्त शराब पर अरकार दारू भट्ठी का होलोग्राम लगा होना बताया जा रहा है। जब्त शराब की अनुमानित कीमत लगभग 2.03 लाख बताई जा रही है।

इस मामले का एक और अहम पहलू AD न्यूज़ के संवाददाता उत्तम साहू से जुड़ा है। उनका आरोप है कि उन्होंने पहले भी अरकार दारू भट्ठी से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अवैध शराब परिवहन का मुद्दा लगातार अपनी खबरों के माध्यम से उठाया था। उनके अनुसार, इसके बाद आबकारी विभाग ने पुलिस थाना सनौद में आवेदन देकर उन्हें झूठे मामले में फंसाने का प्रयास किया।यह केवल एक पत्रकार को दबाने का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर दबाव बनाने का भी गंभीर विषय है।

इस पूरे मामले ने आबकारी विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। यदि इतनी बड़ी मात्रा में शराब भट्ठी से बाहर निकलकर दूसरे क्षेत्र तक पहुंच गई, तो आखिर निगरानी व्यवस्था कहां थी? क्या केवल पांच कर्मचारियों को हटाकर पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है, या फिर पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होगी?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पहले से कथित अनियमितताओं की जानकारी और शिकायतें AD न्यूज़ के माध्यम से सामने आ रही थीं, तब समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यदि शराब की कथित अवैध सप्लाई लंबे समय से चल रही थी, तो इसकी जिम्मेदारी केवल कर्मचारियों तक कैसे सीमित हो सकती है? पूरे प्रकरण में किसकी भूमिका थी, इसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

जनता यह जानना चाहती है कि क्या जिला प्रशासन और आबकारी विभाग इस मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से बचेंगे, या फिर पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कर वास्तविक जिम्मेदारों तक पहुंचेंगे। यदि किसी निर्दोष को झूठे मामले में फंसाने का प्रयास हुआ है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, और यदि अवैध शराब परिवहन में कोई भी व्यक्ति या अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। यही प्रशासन की निष्पक्षता और कानून के शासन की वास्तविक कसौटी होगी।

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