गुरूर SDM की कार्रवाई में अरकार से जप्त हुई अर्जुन लकड़ी फिर बेनकाब हुआ सनौद का कुख्यात अवैध लकड़ी ठेकेदार पुखराज

बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के गुरूर में प्रशासनिक निर्देश पर ग्राम पंचायत अरकार में अर्जुन लकड़ी की जप्ती ने एक बार फिर शासन-प्रशासन की बड़ी लापरवाही, लकड़ी की खुलेआम हो रही व्यापारीकरण की राजनीति और अवैध तस्करी के जाल की पोल उतारकर रख दी है। इस कार्रवाई में ग्राम सनौद के कुख्यात अवैध लकड़ी ठेकेदार पुखराज का नाम फिर सामने आने से यह साफ हो गया है कि जंगलों को निचोड़कर पैसे की मशीन बनाने वाले ऐसे लोग न सिर्फ कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं बल्कि शासन की नाक के नीचे पूरे पर्यावरण को बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं।इस खुलासे में प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद की सक्रिय खोजी भूमिका एक बार फिर निर्णायक साबित हुई है।
शासन सो रहा है या सोने का नाटक कर रहा है?
बालोद जिले में लगातार बढ़ रही अवैध लकड़ी तस्करी सत्ता तंत्र पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। आखिर किसकी शह पर पुखराज जैसे लोग सालों से अवैध लकड़ी को काटकर करोड़ों कमाने के धंधे में बेखौफ घूम रहे हैं?क्या शासन को इस बात का अंदाजा नहीं कि अर्जुन जैसे मूल्यवान पेड़ों का कटना कितना बड़ा पर्यावरणीय खतरा है?या शासन जानकर भी आंखें मूंदे बैठा है?अर्जुन पेड़ न सिर्फ पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण हैं बल्कि भू-क्षरण रोकने, प्रदूषण कम करने और स्थानीय जैवविविधता को बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे पेड़ों का अवैध दोहन सीधी-सीधी पर्यावरण हत्या है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि शासन ने इसे “सामान्य अपराध” मान लिया है जबकि असल में यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के खिलाफ सबसे बड़ा हमला है।
अरकार में जप्ती—कितनी बड़ी सच्चाई छिपी है इसके पीछे?
ग्राम पंचायत अरकार में अर्जुन लकड़ी जप्त होना कोई छोटी घटना नहीं है। यह वर्षों से चल रहे अवैध कटाई नेटवर्क की सिर्फ एक परत है। कार्रवाई भले ही SDM के निर्देश पर हुई हो, लेकिन यह सवाल अब भी जस का तस है ।अगर प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद लगातार इन मामलों को उजागर न करता तो क्या प्रशासन कभी आंखें खोलता?शासन की सुस्ती और विभागों की उदासीनता ने लकड़ी माफियाओं को इतना ताकतवर बना दिया है कि वे रातों-रात जंगल के टुकड़े गायब कर देते हैं और कोई उंगली भी नहीं उठाता।
पुखराज सनौद—वन विनाश का “ठेकेदार मॉडल”
पुखराज सनौद का नाम सिर्फ एक ठेकेदार का नहीं, बल्कि पूरे उस अवैध तंत्र का प्रतीक बन चुका है जो दलालों, भ्रष्ट अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहा है।
यह नेटवर्क जंगलों को वैध कागजों के बिना काटता है, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में लकड़ियाँ रात में खपाता है और फिर शासन को चुनौती देता हुआ खुलेआम घूमता है।यह सीधे-सीधे कानून का धज्जियां उड़ाना है और यह शासन की असली कमजोरी का जीवंत उदाहरण।
प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद—जंगल बचाने की लड़ाई का सबसे मजबूत मोर्चा
जिले में लगातार उजागर किए गए भ्रष्टाचार, अवैध कटाई और प्रशासनिक उदासीनता के मामलों में प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद की भूमिका अब जनता के भरोसे का पर्याय बन चुकी है।अरकार की यह जप्ती भी क्लब की सतत निगरानी, तथ्य संग्रह और दबाव की देन है।
शासन के प्रति कड़ा संदेश
अब वक्त आ गया है कि शासन सिर्फ नोटिस और प्रेस बयान जारी करने के बजाय जमीन पर उतरकर असली कार्रवाई करे।अवैध लकड़ी तस्करी को नियंत्रित करना सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पर्यावरण और भविष्य की रक्षा का नैतिक कर्तव्य है।यदि शासन आज भी नहीं चेता तो आने वाले वर्षों में बालोद का जंगल सिर्फ फोटो और सरकारी फाइलों में ही बचेगा।



