हमर छत्तीसगढ़

गुजरा में शिक्षा और स्वच्छता की कबाड़ डौंडी से रायपुर तक जवाबदेही के कटघरे में पूरा तंत्र

 

रिपोर्टर :- दिनेश कुमार नेताम

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद में ग्राम पंचायत गुजरा आज केवल एक गांव नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की नाकामी का सार्वजनिक चार्जशीट बन चुका है। संकुल केंद्र प्रभारी कार्यालय से लेकर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) तक की बदहाली यह साबित करती है कि डौंडी ब्लॉक में जवाबदेही नाम की कोई व्यवस्था शेष नहीं बची है। सवाल अब व्यवस्था से नहीं, बल्कि उन अफसरों और जनप्रतिनिधियों से है, जिनके हस्ताक्षर से फाइलें चलती हैं और जिनके नाम पर योजनाएं गिनाई जाती हैं।

डौंडी ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से सबसे पहला और सबसे कठोर सवाल

जब संकुल केंद्र प्रभारी कार्यालय आपकी प्रत्यक्ष प्रशासनिक सीमा में आता है, तो उसकी जर्जर हालत पर आपकी चुप्पी क्या लापरवाही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से भागने का प्रमाण नहीं है? क्या शिक्षा की निगरानी केवल बैठकों और निरीक्षण प्रतिवेदन तक सीमित रह गई है? यदि नहीं, तो गुजरा का यह खंडहर किसकी अनुमति से बना?

इसके बाद कटघरे में खड़ा है जिला शिक्षा अधिकारी बालोद

क्या आपको जिले के शैक्षणिक ढांचे की यह दुर्दशा दिखाई नहीं देती, या फिर देखने का साहस नहीं है? जिन परिसरों से शिक्षा की गुणवत्ता मापी जानी चाहिए थी, वे आज प्रशासनिक असफलता की तस्वीर बने हैं। यह चूक नहीं, बल्कि प्रशासनिक अपराध है, जिसकी सीधी जिम्मेदारी जिला स्तर के अधिकारियों पर तय होनी चाहिए।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की स्थिति तो और भी अधिक शर्मनाक है। जिस योजना को देश का गौरव बताया गया, उसी योजना के कचरा प्रबंधन संसाधन गुजरा में निष्क्रिय और जंग खाते खड़े हैं। यह दृश्य सीधे तौर पर जिला प्रशासन बालोद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। क्या निरीक्षण केवल कागज़ों में होता है? क्या रिपोर्टें बिना देखे ही उच्च स्तर तक भेज दी जाती हैं?
अब सवाल रायपुर तक जाता है।

मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से यह पूछना अनिवार्य हो गया है

कि क्या यही वह सुशासन है, जिसके दावे मंचों से किए जाते हैं? क्या गांवों में शिक्षा और स्वच्छता की हालत इतनी दयनीय होने के बाद भी जवाबदेही तय नहीं होगी? यदि नहीं, तो यह मान लिया जाए कि योजनाएं केवल प्रचार का साधन बनकर रह गई हैं।गुजरा की स्थिति यह साफ संकेत देती है कि प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही की रीढ़ टूट चुकी है। न समय पर निरीक्षण, न रखरखाव, न कार्रवाई—और ऊपर से मौन। यह मौन सबसे बड़ा अपराध है, क्योंकि यह लापरवाही को संरक्षण देता है।अब चेतावनी स्पष्ट और सख्त है।यदि संकुल केंद्र प्रभारी कार्यालय और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) से जुड़े परिसरों की तत्काल मरम्मत, सफाई और सक्रियता सुनिश्चित नहीं की गई,
यदि जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई नहीं हुई,
तो यह माना जाएगा कि प्रशासन जानबूझकर जनता की आंखों में धूल झोंक रहा है।गुजरा सुधार की मांग नहीं कर रहा, जवाब मांग रहा है।और यदि यह जवाब नहीं मिला, तो प्रशासन की यह उदासीनता इतिहास में उसकी सबसे बड़ी विफलता के रूप में दर्ज होगी।

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