हमर छत्तीसगढ़

डीएवी स्कूल बचेली में बवाल: हठधर्मी प्राचार्या के खिलाफ शिक्षकों का आक्रोश, एक शिक्षिका गिरी हुई बेहोश

बचेली :- डीएवी पब्लिक स्कूल छत्तीसगढ़ के बचेली में सोमवार को शिक्षकों का धैर्य जवाब दे गया। प्राचार्या चेतना शर्मा के कथित जुल्मी व्यवहार से परेशान होकर सभी शिक्षक सड़क पर उतर आए और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के दौरान तनाव इतना बढ़ा कि एक महिला शिक्षिका अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

वर्षों से विवादों में घिरी प्राचार्या

शिक्षकों का कहना है कि चेतना शर्मा पिछले पाँच वर्षों से लगातार विवादों में उलझी रही हैं। उनका रवैया हमेशा अपमानजनक और तानाशाही रहा है। आरोप है कि वह निर्धन परिवारों के बच्चों को नीचा दिखाती हैं, स्टाफ़ से घरेलू सामान मँगवाती हैं, यहाँ तक कि शिक्षकों से शौचालय साफ करवाने तक के आदेश देती हैं।

छात्रों तक का अपमान

एक छोटे छात्र ने आँसुओं के बीच बताया कि प्राचार्या ने उसकी माँ को “डायन” कहकर अपमानित किया और उसकी पढ़ाई रोक दी। बच्चे ने मीडिया को बताया कि मैडम ने कहा— “तुम्हारी औकात नहीं है इस स्कूल में पढ़ने की।”

धमकियों का डर

शिक्षकों का आरोप है कि विरोध करने पर प्राचार्या नौकरी से निकालने की धमकी देती थीं। कई बार महिला अपराधों के फर्जी मामलों में फँसाने की चेतावनी भी दी गई।

प्रबंधन की चुप्पी पर भड़के शिक्षक

सूत्रों के अनुसार 27 शिक्षकों ने 11 नवंबर को ही एनएमडीसी प्रबंधन को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन जब तक कार्रवाई नहीं हुई, तब तक हालात बिगड़ते गए। मजबूरन शिक्षक सड़कों पर उतरे।

जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप

स्थिति गंभीर होती देख नगरपालिका अध्यक्ष राजू जायसवाल और उपाध्यक्ष सतीश प्रेमचंदानी मौके पर पहुँचे। उन्होंने शिक्षकों की बातें सुनीं और एनएमडीसी अधिकारियों को अवगत कराया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि चेतना शर्मा पर जांच होगी और जब तक जांच पूरी नहीं होती, उन्हें विद्यालय में प्रवेश नहीं मिलेगा।

गौरतलब है कि जब प्रतिनिधियों ने प्राचार्या से पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने बातचीत से इनकार कर दिया और कहा कि वह अवसाद की दवाइयाँ ले रही हैं, इसलिए कोई चर्चा नहीं कर पाएँगी।

आंदोलन की चेतावनी

पालिका अध्यक्ष जायसवाल और उपाध्यक्ष प्रेमचंदानी ने कहा “बच्चों की शिक्षा और शिक्षकों की गरिमा पर चोट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि प्रबंधन ने तुरंत प्राचार्या को पद से नहीं हटाया तो नगरव्यापी आंदोलन होगा।”

मुक्ता सिंह यादव

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन प्रदेश उपाध्यक्ष नने कहा कि ऐसे तानाशाही प्रवृत्ति वाले प्राचार्य का पद पर बने रहना शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य के लिए घातक सिद्ध होगा। अतः यह आवश्यक है कि संबंधित प्राचार्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए तथा उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी पदाधिकारी द्वारा शिक्षकों पर इस प्रकार के अत्याचार और मानसिक प्रताड़ना न हो सके।

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