हमर छत्तीसगढ़

बालोद में अफसरशाही का गंदा सच, जिला प्रशासन की घटिया करतूत बेनकाब, कसही गांव की बुजुर्ग महिला बरसात में डूबे घर में जीने को मजबूर

बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में जनपद पंचायत डौंडीलोहारा के अंतर्गत ग्राम पंचायत कसही से जिला प्रशासन की असफलता का सबसे घटिया और शर्मनाक चेहरा उजागर हुआ है। यहां एक असहाय 70 वर्षीय महिला का घर बरसात के पानी में डूब गया। घर के भीतर रखा बर्तन, बिस्तर, कपड़ा और राशन सब पानी में तैरते नज़र आए। यह महिला उम्र और कमजोरी की वजह से मजदूरी या श्रम कार्य करने में पूरी तरह असमर्थ हैं, फिर भी आज तक उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी बुनियादी सुविधा का लाभ नहीं मिला।

प्रधानमंत्री ने वादा किया था कि हर गरीब को छत मिलेगी, कोई भी बेघर नहीं रहेगा। लेकिन कसही गांव की यह तस्वीर साबित करती है कि यह वादा सिर्फ़ भाषणों और कागजों में रह गया। ज़मीनी हकीकत इतनी गंदी है कि गरीब महिला बरसात में अपना टूटा-फूटा घर बचाने की कोशिश में तड़प रही है, जबकि जिला प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। यह घटना केवल एक महिला की पीड़ा नहीं, बल्कि प्रशासन की निकम्मी और अमानवीय सोच का खुला प्रमाण है।

गांव वालों का कहना है कि कई बार पंचायत और अधिकारियों को आवेदन दिया गया, मगर हर बार केवल आश्वासन मिला। जिला स्तर के अधिकारी कागजों पर योजनाओं की सफलता गिनाते रहे, पर हकीकत में गरीब को राहत की एक बूंद भी नहीं पहुंची। यह साबित करता है कि बालोद का जिला प्रशासन घटिया रवैया अपनाते हुए जनता की पीड़ा से पूरी तरह बेखबर है।

प्रशासन की संवेदनहीनता और भ्रष्ट सोच का गंदा खेल अब किसी से छुपा नहीं। अधिकारी केवल बैठकों और रिपोर्टों में वाहवाही लूटते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि गरीब महिला बरसात में भूख और असुरक्षा के बीच जीवन काट रही है। यह जिला प्रशासन की पूरी नालायकी और असफलता का नंगा नाच है।

बालोद जिले में योजनाओं के नाम पर ढकोसला चल रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पाने के लिए गरीब सालों से दर-दर भटकते हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ़ कागजी कार्यवाही और झूठे वादे मिलते हैं। अफसरशाही की यह गंदी करतूत गरीब जनता का भविष्य निगल रही है।

कसही गांव की यह दर्दनाक तस्वीर अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई है। लोग सवाल कर रहे हैं कि जब एक असहाय महिला तक सरकारी योजना नहीं पहुंच सकी, तो बाकी गरीब जनता की हालत का अंदाज़ा सहज लगाया जा सकता है। यह साफ है कि बालोद जिला प्रशासन पूरी तरह नाकाम, बेकार और नालायक साबित हुआ है।

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