“डीईओ मधुलिका तिवारी – हर जिले में भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला, अब बालोद में शिक्षा का सौदा शुरू!”
“डीईओ मधुलिका तिवारी – हर जिले में भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला, अब बालोद में शिक्षा का सौदा शुरू!”

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद निवासी आरटीआई कार्यकर्ता यशवंत निषाद ने शिक्षा विभाग की सच्चाई उजागर करते हुए कहा कि जिले की शिक्षा व्यवस्था पर ऐसे घोटाले कलंक की तरह चिपके हुए हैं, जिनकी जड़ें पूर्व पदस्थ अधिकारियों से जुड़ी हैं। उदाहरण के तौर पर डौंडीलोहारा ब्लॉक को देखें – यहां स्कूल मरम्मत, फर्नीचर खरीदी और पंखों की सप्लाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन कक्षाएं आज भी खंडहर जैसी हैं। बच्चों के लिए डेस्क-कुर्सी का वादा तो किया गया, मगर पहुंचा केवल पुराना कबाड़।
गुण्डरदेही विकासखंड में तो ट्रांसफर-पोस्टिंग को खुलेआम कमाई का जरिया बना दिया गया। योग्य शिक्षक महीनों दौड़ते रहे और जिसने मोटी रकम चढ़ाई, उसका आदेश चुटकियों में जारी हुआ। शाला भवन निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल कर सरकारी धन ठेकेदारों और अधिकारियों की जेब में समा गया।
वर्तमान में बालोद की जिला शिक्षा अधिकारी बनीं मधुलिका तिवारी का पिछला कार्यकाल किसी बदनुमा दाग से कम नहीं रहा। जहां-जहां वे पदस्थ रहीं, वहां सुधार के बजाय गड़बड़ियों और हेराफेरी की कहानियां गूंजती रहीं। बस्तर संभाग में उनके समय मिड-डे-मील घोटाला उजागर हुआ, जिसमें बच्चों की थाली से दाल-चावल काटकर राशन ठेकेदारों की गाड़ियों में भर दिया गया। छात्रवृत्ति वितरण में पात्र विद्यार्थियों को रकम न देकर फर्जी नामों पर भुगतान किया गया। पाठ्यपुस्तक खरीदी घोटाला भी गूंजा—बजट स्वीकृत हुआ, लेकिन सत्र समाप्त होने के बाद भी कई विद्यालयों तक किताबें नहीं पहुंचीं। यूनिफार्म आपूर्ति में तो कमीशनखोरी ने सारी व्यवस्था की जड़ें खोखली कर दीं।
अब वही अधिकारी बालोद में डीईओ की कुर्सी पर बैठ चुकी हैं। जिले के शिक्षकों और पालकों के मन में यह गहरी चिंता है कि जिनका हर पदस्थापना स्थल भ्रष्टाचार का अड्डा बना, उनसे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की उम्मीद कैसे की जाए?
आरटीआई कार्यकर्ता मोहन निषाद का तंज है—
“तिवारी जी जहां जाती हैं, वहां शिक्षा नहीं, घोटालों की खेती होती है। अब बालोद उनका नया प्रयोगशाला बन चुका है।




