भ्रष्टाचार का किला हिला — CMHO कार्यालय बालोद में रिश्वतखोरी के खेल का पर्दाफाश!

बालोद स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार का नंगा नाच — ACB की रेड में दो बाबू रंगे हाथ पकड़े गए! अधिकारी की मिलीभगत से चला रहा था रिश्वतखोरी का अड्डा
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद: जिला स्वास्थ्य विभाग की “सड़ी गंध” एक बार फिर पूरे प्रदेश में फैल गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय बालोद गुरुवार को एसीबी रायपुर की टीम के छापे के बाद हिल गया। टीम ने दो भ्रष्ट बाबुओं — युगल किशोर साहू और सुरेंद्र कुमार सोनकर (सहायक ग्रेड-2) को रिश्वत की रकम लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
दोनों के पास से ₹30,000 नकद जब्त किए गए, जो उन्होंने विभाग के ही वाहन चालक मुकेश कुमार यादव से सर्विस बुक सत्यापन और एरियर भुगतान के नाम पर मांगे थे।

यह मामला न सिर्फ दो कर्मचारियों की लालच की पोल खोलता है, बल्कि इस बात को भी साबित करता है कि स्वास्थ्य विभाग में ऊपर से नीचे तक रिश्वतखोरी की जड़ें गहरी हैं।वाहन चालक मुकेश यादव ने बताया कि जब उसे पुनः वाहन चालक के पद पर पदस्थ किया गया, तब इन दोनों बाबुओं ने उससे ₹50,000 की मोटी रकम की मांग की।मुकेश ने पहले ही ₹20,000 “एडवांस” दे दिए थे, लेकिन जब बाकी के ₹30,000 की जबरदस्ती की गई, तो उसने एसीबी रायपुर से संपर्क किया।एसीबी की टीम ने शिकायत की पुष्टि के बाद सीएमएचओ कार्यालय बालोद में जाल बिछाया और दोनों बाबुओं को रिश्वत लेते 11:30 बजे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।जांच के दौरान जब दोनों के हाथों को फिनॉलफ्थेलीन पाउडर वाले लिक्विड में डुबोया गया, तो द्रव गुलाबी हो गया — रिश्वत लेने की पुष्टि साफ तौर पर सामने आई।
यह दृश्य देखकर पूरा कार्यालय सकते में पड़ गया। टीम ने देर शाम तक सीएमएचओ दफ्तर की तलाशी ली और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के तहत मामला दर्ज कर लिया। दोनों आरोपियों को आगे की कार्रवाई हेतु रायपुर ले जाया गया है।
सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने तीखा बयान देते हुए कहा —
“इतनी बड़ी धांधली बिना बड़े अफसरों के संरक्षण के मुमकिन ही नहीं! ये केवल दो बाबुओं की कहानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साजिश है। CMHO कार्यालय अब स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि ‘रिश्वतखोरी का ठिकाना’ बन चुका है। अगर जांच ऊपर तक पहुंचे, तो बड़े-बड़े चेहरे बेनकाब होंगे।बालोद में एसीबी की यह कार्रवाई इस बात का जीता-जागता सबूत है कि जनता की सेवा के नाम पर बैठे कुछ अफसर अब सिर्फ नोटों की सेवा में जुटे हैं।
सवाल यह उठता है — क्या अब भी प्रशासन इन भ्रष्ट तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की हिम्मत दिखाएगा या फिर हमेशा की तरह मामला फाइलों में दफन कर दिया जाएगा?



