हमर छत्तीसगढ़

मधुलिका का गंदा खेल — घोटालों में सने जितेंद्र गजेन्द्र को बनाया ‘उल्लास प्रभारी’, अब भ्रष्टाचारी सिखाएगा नैतिकता!”

बालोद — छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में  शिक्षा नहीं, शर्म बेचने का कारोबार चल रहा है। डीईओ ऑफिस की सरगना मधुलिका तिवारी ने जो किया, उसने जिले की इज्जत को फिर नंगा कर दिया। जिस जितेंद्र गजेन्द्र ने स्कूल को मेला समझ रखा था, बच्चों को पढ़ाना पाप मान लिया था, वही अब रायपुर जाकर “उल्लास प्रभारी” बनकर बच्चों को सिखाएगा कि शिक्षा क्या होती है।ये वही गजेन्द्र है, जो सरेखा स्कूल में पदस्थ था, पर डीईओ ऑफिस में हाजिरी लगाकर महीने का पूरा वेतन हजम करता रहा। घोटाले के धंधे में इतना लिप्त कि डिजिटल सिग्नेचर घोटाले का नाम सुनते ही लोग उसी का नाम बोल देते हैं। अब वही गजेंद्र “ज्ञान का ठेकेदार” बन गया है। यानी जिसने खुद किताबों को धूल चटाई, वो अब बच्चों को ज्ञान का पाठ पढ़ाएगा — वाह रे बालोद शिक्षा विभाग, शर्म भी अब छुट्टी पर चली गई है!मधुलिका तिवारी का ये फैसला बता रहा है कि डीईओ ऑफिस अब शिक्षा का मंदिर नहीं, बल्कि घोटालेबाजों का आश्रय स्थल बन चुका है। यहां जो जितना भ्रष्ट, उतना प्रमोशन! जिले के काबिल शिक्षक कोने में धकेल दिए गए, और यह “ऑफिसिया परजीवी” अब सम्मान का तमगा पहनकर घूमेगा।बालोद का दुर्भाग्य है कि यहां के अधिकारी और नेता सब देखकर भी गूंगे बन गए हैं। यह निर्णय नहीं, बल्कि जिले की आत्मा पर कालिख है।

जिसे देखकर बच्चे डरें, वही अब बच्चों का “मार्गदर्शक” बना बैठा है — इससे गंदा मज़ाक बालोद ने आज तक नहीं देखा।

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