डॉ.कमलेश देशमुख को पीएच.डी. उपाधि – जनजातीय महिला नेतृत्व पर अनूठा शोध बना प्रेरणा स्रोत

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला निवासी ने भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग (छत्तीसगढ़) के कला संकाय, राजनीति विज्ञान विषय के शोधार्थी कमलेश कुमार देशमुख ने अपनी मेहनत, लगन और अटूट समर्पण से “पंचायती राज व्यवस्था में दंतेवाड़ा जिले में अनुसूचित जनजाति महिला नेतृत्व का प्रभाव एवं प्रमुख चुनौतियाँ – एक अध्ययन” विषय पर उत्कृष्ट शोध कर डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) की उपाधि अर्जित की है।यह शोधकार्य विश्वविद्यालय के विद्वान मार्गदर्शक डॉ. आशीष नाथ सिंह के मार्गदर्शन में पूर्ण हुआ। संकाय अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह ने इस उपलब्धि को गर्व का क्षण बताते हुए डॉ. देशमुख को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह शोध ग्रामीण भारत में महिला नेतृत्व की सशक्त पहचान प्रस्तुत करता है।अपने इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर डॉ. देशमुख ने अपने मार्गदर्शक, संकाय अध्यक्ष, कुलाधिपति, कुलपति, कुलसचिव एवं सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने हेडमा मांझी शासकीय महाविद्यालय कटेकल्याण, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा के सहयोग के लिए भी हृदय से आभार जताया।उन्होंने अपनी सफलता को अपने पिता महंगराम देशमुख (से.नि. प्रधान आरक्षक, छत्तीसगढ़ पुलिस) तथा स्वर्गीय माता श्रीमती अमरीका बाई देशमुख के आशीर्वाद को समर्पित किया। साथ ही पत्नी श्रीमती सोनम देशमुख, पुत्र भार्गव, भाई योगेंद्र, बहन गायत्री, भतीजी भूमि, और दीदी खिलेश्री देशमुख के स्नेह, प्रेरणा और सहयोग को अपनी सफलता की आधारशिला बताया।डॉ. देशमुख ने कहा कि उनका यह शोध न केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि है, बल्कि यह ग्रामीण भारत की उन जनजातीय महिला प्रतिनिधियों के संघर्ष और नेतृत्व क्षमता का जीवंत दस्तावेज है, जो सामाजिक परिवर्तन की दिशा में मूक रूप से योगदान दे रही हैं।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह अध्ययन पंचायतों में महिला सशक्तिकरण और नीति-निर्माण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा विश्वविद्यालय परिवार ने डॉ. कमलेश देशमुख की इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि उनकी मेहनत और समर्पण नई पीढ़ी के शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।



