हमर छत्तीसगढ़

शौर्य की शपथ, विजय की विरासत बालोद में 1971 के विजयी योद्धाओं को राष्ट्रनमन

बालोद:- भारत के सैन्य इतिहास में वर्ष 1971 केवल एक युद्ध की स्मृति नहीं, बल्कि राष्ट्र की अस्मिता, स्वाभिमान और अपराजेय संकल्प का प्रतीक है। यह वह निर्णायक क्षण था, जब भारतीय सेना ने अपने पराक्रम, रणनीति और बलिदान से देश को ऐतिहासिक विजय दिलाई। इसी गौरवशाली विरासत को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, जिला बालोद (छत्तीसगढ़) द्वारा विजय दिवस का प्रेरणास्पद और भव्य आयोजन किया गया, जिसने पूरे जिले को देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत कर दिया।इस आयोजन की शुरुआत विद्यालयीन छात्राओं द्वारा निकाली गई अनुशासित और ऊर्जावान रैली से हुई। लगभग 300 छात्राओं ने तिरंगे के साथ कदमताल करते हुए यह संदेश दिया कि भारत का भविष्य राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा से सशक्त है। यह रैली घड़ी चौक से प्रारंभ होकर सदर बाजार और मधु चौक होते हुए जय स्तंभ चौक पहुंची, जहां रीत परेड के माध्यम से भारत माता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों को नमन किया गया। यह क्षण न केवल भावुक था, बल्कि हर नागरिक के मन में गर्व की अनुभूति भरने वाला भी रहा।इसके पश्चात आयोजित गरिमामय मंचीय कार्यक्रम में दीप प्रज्वलन के साथ वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर बालोद जिले के शहीद परिवारों का सम्मान कर यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि राष्ट्र अपने बलिदानियों को कभी विस्मृत नहीं करता। साथ ही नगर सेना में नव चयनित महिला अभ्यर्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, जो बदलते भारत में नारी शक्ति की सशक्त भूमिका को रेखांकित करता है।कार्यक्रम की गरिमा उस समय और बढ़ गई, जब समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए देवेन्द्र डड़सेना को बालोद गौरव अलंकरण से सम्मानित किया गया।पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका के लिए एमंत साहू,खेल जगत में उपलब्धियों के लिए किशोर नाथ योगी,सामाजिक सेवा में सतत योगदान हेतु कोमल कुमार साहू,तथा मीडिया में निर्भीक एवं प्रभावी पत्रकारिता के लिए दैनिक छत्तीसगढ़ वॉच अखबार के संवाददाता एवं प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद के महामंत्री कुमारी मीनू साहू को सम्मान प्रदान किया गया। यह सम्मान इस बात का प्रतीक रहा कि राष्ट्रसेवा केवल सीमा पर नहीं, बल्कि समाज के हर क्षेत्र में की जा सकती है।इस आयोजन में 1971 भारत–पाक युद्ध के योद्धा कर्नल जे.एस.एस. कक्कड़ (सेवानिवृत्त) की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गौरव प्रदान किया। उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में उस ऐतिहासिक युद्ध के अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह विजय भारतीय सैनिकों के अद्वितीय साहस, अनुशासन और सर्वोच्च बलिदान का परिणाम थी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें।कार्यक्रम में प्रांत संघचालक श्री टोप लाल वर्मा, पुलिस अधीक्षक बालोद  योगेश कुमार पटेल, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रतिभा चौधरी, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती टेमरिया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला कार्यवाहक संतोष साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पूर्व सैनिक और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद जिला बालोद के अध्यक्ष  नंदकिशोर साहू ने की।अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि विजय दिवस का यह आयोजन केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि युवाओं में देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का माध्यम है। 1971 की विजय हमें यह सिखाती है कि एकजुट भारत हर चुनौती का सामना कर सकता है। यह आयोजन सैनिकों के प्रति सम्मान और शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सशक्त प्रयास है।कार्यक्रम के समापन पर बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को जोश और भावनाओं से भर दिया। उस दिन बालोद की धरती पर 1971 की विजय केवल इतिहास नहीं रही, बल्कि वर्तमान की चेतना और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर गूंजती रही।

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