हमर छत्तीसगढ़

विवादों में घिरे अधिकारी को नोडल बनाने पर सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद का तीखा प्रहार

नेशनल जंबूरी की आड़ में नया खेल?


बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम दुधली में आयोजित होने जा रहे प्रथम नेशनल रोवर-रेंजर जंबूरी को लेकर जिला प्रशासन बड़े उत्साह और भव्यता के दावे कर रहा है। कलेक्टर द्वारा स्वयं आयोजन स्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को बेहतर, अनुशासित और गरिमामय आयोजन के निर्देश दिए गए। लेकिन इन्हीं निर्देशों के समानांतर एक ऐसा प्रशासनिक निर्णय सामने आया है, जिसने पूरे आयोजन की नीयत और पारदर्शिता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।शिक्षा विभाग द्वारा इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन का नोडल अधिकारी ऐसे व्यक्ति को बनाया गया है, जिनका नाम पूर्व से ही विवादों, शिकायतों और गंभीर आरोपों से जुड़ा रहा है। यह नियुक्ति न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि शासन-प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।

सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने उठाए तीखे सवाल

इस पूरे मामले पर प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने खुलकर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि “नेशनल जंबूरी जैसे राष्ट्रीय आयोजन में बच्चों, युवाओं और देश की प्रतिष्ठा दांव पर होती है। ऐसे में अधिकारी हिमांशु मिश्रा जिन पर पहले से ही वित्तीय अनियमितता और कर्मचारियों के शोषण जैसे घिनौना आरोप लगते रहे हों, उन्हें नोडल बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”मोहन निषाद ने यह भी कहा कि यह केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि प्रशासनिक संरक्षण की खतरनाक मिसाल है, जो ईमानदार अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल तोड़ती है।

पूर्व आरोपों का साया, फिर भी अहम जिम्मेदारी

जिस अधिकारी को नोडल बनाया गया है, उन पर पूर्व में सरकारी धन के दुरुपयोग, कार्यालयीन दबाव, अधीनस्थ कर्मचारियों के मानसिक शोषण और मनमानी कार्यशैली को लेकर लगातार शिकायतें उठती रही हैं। कर्मचारी संगठनों के बीच यह नाम लंबे समय से भय और दबाव की संस्कृति का प्रतीक बना हुआ है।सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इन तथ्यों से अनजान है? या फिर जानबूझकर ऐसे व्यक्ति को आगे किया जा रहा है, जिनकी कार्यशैली पहले भी विवादों को जन्म देती रही है?

क्या जंबूरी बनेगा अनियमितताओं का केंद्र?

नेशनल जंबूरी जैसे आयोजन में करोड़ों रुपये के खर्च, टेंट, भोजन, परिवहन, सामग्री खरीदी और आवास व्यवस्था से जुड़े निर्णय होते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद का कहना है कि “जहां पैसा और शक्ति एक साथ आती है, वहां पारदर्शिता सबसे जरूरी होती है। लेकिन यहां तो उल्टा प्रयोग किया जा रहा है।”स्थानीय नागरिकों में यह आशंका गहराने लगी है कि कहीं यह आयोजन भी अव्यवस्था, पक्षपात और संभावित वित्तीय गड़बड़ियों की भेंट न चढ़ जाए।

प्रशासन की चुप्पी, संदेह और गहरा

सबसे गंभीर बात यह है कि इस नियुक्ति को लेकर उठ रहे सवालों पर जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है। न तो आरोपों का खंडन किया गया, न ही नियुक्ति के औचित्य को जनता के सामने रखा गया।यह चुप्पी अपने आप में बहुत कुछ कहती है।

शासन की गरिमा बनाम विवादित चेहरे

नेशनल जंबूरी जैसे कार्यक्रम देशभर से आए प्रतिभागियों के सामने छत्तीसगढ़ और बालोद जिले की छवि प्रस्तुत करते हैं। यदि आयोजन की कमान ऐसे विवादित अधिकारियों के हाथों में दी जाती है, तो यह सीधे तौर पर शासन की गरिमा और प्रशासन की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है।

जनहित की स्पष्ट मांग

सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद सहित जागरूक नागरिकों की मांग है कि—

  • नोडल अधिकारी की नियुक्ति पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए
  • पूर्व में लगे आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए
  • नेशनल जंबूरी को विवादों से मुक्त रखा जाए

क्योंकि यदि यह आयोजन सवालों की भेंट चढ़ा, तो जिम्मेदारी केवल एक अधिकारी की नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की होगी।

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