नवसाक्षरता की मशाल जली खम्हारटोला में उल्लास मेले ने शिक्षा को बनाया जनआंदोलन

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डौंडी विकासखंड अंतर्गत संकुल नया बाजार राजहरा की प्राथमिक शाला खम्हारटोला–02 में आयोजित “उल्लास मेला” केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक चेतना, सामूहिक सहभागिता और नवसाक्षर भारत के संकल्प का जीवंत उत्सव बनकर उभरा। यह आयोजन शिक्षा को कागजों से निकालकर जमीन पर उतारने की एक सशक्त पहल साबित हुआ, जिसमें हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी ने इसे यादगार बना दिया।इस प्रेरक आयोजन के सूत्रधार रहे संस्था के समर्पित शिक्षक राजमल जैन, जिनके नेतृत्व में उल्लास अभियान से जुड़े शिक्षकों, रसोइयों, एसएमसी सदस्यों तथा नवसाक्षर नागरिकों को आमंत्रित किया गया। पूरे उत्साह और गरिमा के साथ सभी सहभागियों को उल्लास शपथ दिलाई गई, जिसमें आजीवन सीखते रहने, दूसरों को साक्षर बनाने और समाज को शिक्षित दिशा देने का दृढ़ संकल्प लिया गया। विद्यालय परिसर में उल्लास से संबंधित विविध रचनात्मक गतिविधियों ने वातावरण को ऊर्जा और उम्मीद से भर दिया।कार्यक्रम के दौरान प्रधान पाठिका श्रीमती जयंत्री ठाकुर एवं सेजेस प्राचार्य द्वारा नवसाक्षर सदस्यों का आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया गया। यह सम्मान केवल प्रतीकात्मक नहीं था, बल्कि उन लोगों के संघर्ष, संकल्प और सीखने की जिद का सार्वजनिक अभिनंदन था, जिन्होंने उम्र, परिस्थितियों और सीमाओं को पीछे छोड़कर ज्ञान का दामन थामा।संकुल प्राचार्य सहित सभी शिक्षकों ने इस सफल आयोजन के लिए राजमल जैन, संकुल समन्वयक, को हार्दिक बधाइयाँ प्रेषित कीं। उल्लेखनीय है कि संकुल अंतर्गत चार प्राथमिक एवं दो माध्यमिक शालाओं में उल्लास मेले का आयोजन कर शिक्षा को एक साझा अभियान का रूप दिया गया, जिससे यह संदेश गया कि साक्षरता किसी एक विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य है।मेले में श्रीमती रेणुका उइके, धर्मेंद्र ठाकुर, सुश्री किरण श्रीवास्तव, धनसिंह यादव, वेडसी सुमोद, शीला खांडेकर, लेखराज साहू, योगेंद्रनाथ, देवा श्री श्रीवास्तव, देवांगन, ब्रह्मईया रेड्डी, तरुण साहू, पुकेश्वर सिंह, मुकेश कोर्राम, श्रीमती जयंत्री ठाकुर एवं जसवंत उर्वसा सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे, जिनकी मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा को और ऊँचाई दी।बच्चों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उल्लास मेले में नई जान फूंक दी। उनकी प्रस्तुतियों में आत्मविश्वास, संस्कार और सीखने की ललक साफ झलक रही थी। कार्यक्रम के अंत में बच्चों, एसएमसी सदस्यों, नागरिकों एवं नवसाक्षरों को मिष्ठान वितरण कर सामूहिक खुशी साझा की गई।उल्लास मेला का उद्देश्य केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि हर नागरिक के भीतर सीखने की लौ जलाना, आत्मसम्मान को सशक्त करना और शिक्षा को सामाजिक आंदोलन में बदलना है। यह आयोजन इस विश्वास को मजबूत करता है कि जब विद्यालय, शिक्षक और समाज एक साथ कदम बढ़ाते हैं, तब साक्षरता केवल लक्ष्य नहीं रहती—वह बदलाव की सबसे मजबूत बुनियाद बन जाती है।



